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महाशिवरात्रि पर भद्रा का साया? जानिए शिव पूजन के शुभ मुहूर्त और भद्रा का वास्तविक प्रभाव

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लखनऊ, 14 फरवरी। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला महाशिवरात्रि का पर्व इस वर्ष 15 फरवरी 2026 को पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पावन विवाह का प्रतीक माना जाता है। इस दिन शिवभक्त उपवास रखते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और चार प्रहर में महादेव की आराधना करते हैं। मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर सच्चे मन से की गई पूजा से जीवन के कष्टों में कमी आती है और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

इस वर्ष महाशिवरात्रि के साथ भद्रा योग का संयोग भी बन रहा है, जिसे लेकर कई श्रद्धालुओं के मन में असमंजस की स्थिति है। पंचांग के अनुसार 15 फरवरी की शाम 5 बजकर 04 मिनट से भद्रा आरंभ होगी, जो 16 फरवरी की सुबह 5 बजकर 23 मिनट तक प्रभावी रहेगी। इस प्रकार लगभग 12 घंटे से अधिक समय तक भद्रा का काल रहेगा। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब भद्रा का वास पाताल लोक में होता है, तब उसका नकारात्मक प्रभाव पृथ्वी पर नहीं पड़ता। इस कारण महाशिवरात्रि पर शिव पूजन, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक बिना किसी बाधा के किए जा सकते हैं और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की शंका या भय रखने की आवश्यकता नहीं है।

महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव के जलाभिषेक और पूजा के लिए पूरे दिन कई शुभ समय प्राप्त हो रहे हैं। प्रातः काल में पहला शुभ समय सुबह 8 बजकर 24 मिनट से 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इसके बाद दूसरा मुहूर्त 9 बजकर 48 मिनट से 11 बजकर 11 मिनट तक माना गया है। दिन का सबसे श्रेष्ठ अमृत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा, जिसे शिवलिंग पर जल अर्पित करने के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। वहीं जो श्रद्धालु संध्या के समय पूजा करना चाहते हैं, वे शाम 6 बजकर 11 मिनट से 7 बजकर 47 मिनट के बीच भगवान शिव का अभिषेक कर सकते हैं।

महाशिवरात्रि की रात्रि में चार प्रहर की पूजा का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। पहला प्रहर 15 फरवरी की शाम 6 बजकर 11 मिनट से रात 9 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। दूसरा प्रहर 15 फरवरी की रात 9 बजकर 23 मिनट से 16 फरवरी की रात 12 बजकर 34 मिनट तक माना गया है। इसी रात्रि में निशिथ काल आता है, जो शिव आराधना के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। यह काल 16 फरवरी की रात 12 बजकर 09 मिनट से 1 बजकर 01 मिनट तक रहेगा। तीसरा प्रहर रात 12 बजकर 35 मिनट से सुबह 3 बजकर 46 मिनट तक और चौथा प्रहर सुबह 3 बजकर 46 मिनट से सुबह 6 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। इन चारों प्रहरों में की गई पूजा को विशेष फलदायी माना गया है।

महाशिवरात्रि के दिन प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ वातावरण में भगवान शिव की आराधना की जाती है। शिवलिंग पर शुद्ध जल से जलाभिषेक करते हुए “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का स्मरण किया जाता है। मान्यता है कि नियम और श्रद्धा के साथ किया गया जलाभिषेक मन को शांति देता है और जीवन में संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देता है। इस पावन पर्व पर शिवभक्त पूरी आस्था के साथ महादेव की उपासना कर उनसे सुख, शांति और सकारात्मकता की कामना करते हैं।

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