नई दिल्ली, 14 मई। पिछले माह चार राज्यों व एक केंद्र शासित प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों के बाद पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु व पुडुचेरी में नवगठित सरकारें जहां अपना कामकाज शुरू कर चुकी हैं वहीं केरल में परिणाम घोषित होने के 11वें दिन गुरुवार को सस्पेंस खत्म हुआ, जब कांग्रेस हाईकमान ने वीडी सतीशन को कांग्रेस विधायक दल का नेता घोषित किया। इसके साथ ही कांग्रेस नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) को शानदार जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले सतीशन अब राज्य के अगले मुख्यमंत्री बनेंगे।
कांग्रेस मुख्यालय में आज दोपहर आहूत प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सतीशन के नाम की घोषणा की गई। इसके पूर्व हुई शीर्ष नेतृत्व की बैठक में राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की गाइडेंस में आखिरी लेवल की बातचीत हुई।
हाईकमान के स्पष्ट निर्देश के बाद वेणुगोपाल ने दावेदारी वापस ली
हालांकि कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल को चुनाव जीतकर आए ज्यादातर कांग्रेसी विधायकों का सपोर्ट था, लेकिन हाईकमान के साफ निर्देशों के बाद वेणुगोपाल ने आखिरकार शीर्ष पद के लिए अपनी दावेदारी वापस ले ली। बाद में उन्होंने कहा कि उन्हें केंद्रीय नेतृत्व का फैसला स्वीकार है।
वस्तुतः सतीशन ने यह मैंडेट इस बड़े राजनीतिक मूल्यांकन के आधार पर हासिल किया कि कैंपेन कैप्टन के तौर पर उनकी जबर्दस्त लीडरशिप ने गठबंधन को चुनाव में सफलता दिलाई। वहीं रमेश चेन्निथला को, जो आखिरी पलों तक मुख्यमंत्री पद के मजबूत दावेदार बने रहे, आने वाली राज्य कैबिनेट में एक जरूरी पोर्टफोलियो मिलने की उम्मीद है।
मुस्लिम लीग के भारी दबाव ने इस फैसले में अहम भूमिका निभाई
बताया यह भी जा रहा है कि विधानसभा में बहुमत की तकनीकी बातों से आगे बढ़कर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने केरल में लोगों की गहरी भावना और अपने गठबंधन सहयोगियों के पक्के रुख को बहुत ध्यान से देखा। यूडीएफ में दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी मुस्लिम लीग के भारी दबाव ने इस फैसले में अहम भूमिका निभाई।
केरल कांग्रेस, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी और कम्युनिस्ट मार्क्सिस्ट पार्टी समेत दूसरी पार्टियों ने एकमत होकर मांग की कि सतीशन कमान संभालें। सहयोगियों ने केंद्रीय नेतृत्व को साफ तौर पर यकीन दिलाया कि राज्य में उपचुनाव थोपना वोटर्स के लिए एक गैर-जरूरी चुनौती होगी और चेतावनी दी कि ऐसे कदम से शायद अच्छा नतीजा न मिले। इसके साथ ही मुल्लापल्ली रामचंद्रन, वीएम सुधीरन व के. मुरलीधरन जैसे पुराने नेताओं के अहम सपोर्ट ने सतीशन के लिए रास्ता और मजबूत कर दिया।
कड़ी मशक्कत के बाद हो सका नए नेता का चुनाव
देखा जाए तो चार मई को चुनाव के नतीजे आने के तुरंत बाद ही मुश्किल चयन प्रक्रिया शुरू हो गई थी। एआईसीसी ऑब्जर्वर मुकुल वासनिक और अजय माकन ने अपनी पूरी फील्ड रिपोर्ट जमा करने से पहले विधायकों और अलायंस नेताओं से राय लेने के लिए तुरंत राज्य का दौरा किया था।
इसके बाद केंद्रीय नेतृत्व ने वेणुगोपाल, सतीशन और चेन्निथला को सीधी बातचीत के लिए राष्ट्रीय राजधानी बुलाया। इस प्रक्रिया में केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष सनी जोसेफ के साथ व्यापक बातचीत भी शामिल थी। इसके अलावा, हाईकमान ने राज्य इकाई के पूर्व अध्यक्ष वीएम सुधीरन, के. सुधाकरन, एमएम हसन और के. मुरलीधरन के साथ-साथ KPCC अनुशासनात्मक कमेटी के चेयरमैन तिरुवंचूर राधाकृष्णन, कार्यकारी अध्यक्ष पीसी विष्णुनाथ, शफी परम्बिल और एपी अनिल कुमार के साथ खास बातचीत की।
पेशे से वकील सतीशन ने अच्छे प्रदर्शन से बनाई है संगठन में अपनी पहचान
फिलहाल वीडी सतीशन की बात करें तो उनके लिए यह पद उनकी राजनीतिक यात्रा की बड़ी उपलब्धि है। यह फैसला केरलम में लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी और चुनावी हार के बाद कांग्रेस के खुद को नए तरीके से तैयार करने की कोशिश को भी दिखाता है।
कोच्चि जिले में जन्मे सतीशन इसी माह के आखिर में 62 वर्ष के हो जाएंगे। उन्होंने अपनी पहचान गुटबाजी की राजनीति से नहीं बल्कि विधानसभा में अच्छे प्रदर्शन और संगठन में लगातार काम करके बनाई है। पेशे से वकील सतीशन ने 2001 में परावुर से विधानसभा चुनाव जीतकर राजनीति में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस के तेज़ और प्रभावशाली वक्ताओं में अपनी पहचान बनाई। आंकड़ों, तीखे व्यंग्य और दमदार बोलने के अंदाज़ के कारण सतीशन वामपंथी दलों के लिए बड़ी चुनौती बन गए। दिलचस्प यह है कि उन्हें सबसे बड़ी सफलता ऐसे समय में मिली, जब कांग्रेस अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही थी।
इस बीच काग्रेस द्वारा वीडी सतीशन को केरलम का मुख्यमंत्री घोषित किए जाने पर उनके घर पर जश्न शुरू हो गया है। वहीं केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सनी जोसेफ ने कहा, ‘यह बहुत अच्छा फैसला है।’

