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पश्चिम बंगाल : मुर्शिदाबाद में SIR पर बवाल, 50 BLO ने एक साथ दिया इस्तीफा, BDO ऑफिस में जमकर तोड़फोड़

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मुर्शिदाबाद, 14 जनवरी। पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद जिले के फरक्का ब्लॉक में मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर हालात बिगड़ते जा रहे हैं। इस क्रम में SIR के नाम पर आम लोगों को परेशान किए जाने का आरोप लगाते हुए फरक्का ब्लॉक के सभी बूथ लेवल ऑफिसरों ने एक साथ सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा बुधवार सुबह फरक्का ब्लॉक इलेक्शन ऑफिसर यानी ERO को सौंपा गया।

चुनाव आयोग की ओर से बार-बार बदलते हुए आदेश भेजने का आरोप

प्राप्त जानकारी के अनुसार करीब 50 BLO ने अपने पद से एक साथ इस्तीफा दिया। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग की ओर से बिना किसी साफ और ठोस दिशा निर्देश के बार-बार WhatsApp के जरिए बदलते हुए आदेश भेजे जा रहे हैं। पहले कहा गया था कि केवल फॉर्म भरने से प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, लेकिन बाद में सुनवाई के नाम पर आम लोगों को बार-बार फोन कर बुलाया जाने लगा।

फरक्का के टीएमसी विधायक मोनिरुल इस्लाम ने की BLO की अगुआई

इसी SIR प्रक्रिया के तहत हुई सुनवाई के दौरान फरक्का BDO कार्यालय में तोड़फोड़ की घटना भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि करीब 30 से अधिक BLO के एक प्रतिनिधिमंडल ने SIR प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां रखीं। यह प्रतिनिधिमंडल फरक्का के तृणमूल कांग्रेस विधायक मोनिरुल इस्लाम के नेतृत्व में पहुंचा था। इसी दौरान माहौल बिगड़ गया और तोड़फोड़ हुई।

तोड़फोड़ को लेकर आरोप लगाए गए कि विधायक मोनिरुल इस्लाम के SIR प्रक्रिया में धार्मिक आधार पर पक्षपात को लेकर दिए गए बयान के बाद स्थिति बिगड़ी। एक वीडियो में विधायक को यह कहते हुए सुना गया कि यदि कोई अपना नाम राम बताता है तो उससे कोई दस्तावेज नहीं मांगे जाते, लेकिन यदि कोई अपना नाम रहीम बताता है तो उसे परेशान किया जा रहा है।

असली वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से कटने का खतरा

BLO का दावा है कि मौजूदा प्रक्रिया से कई असली वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से कटने का खतरा है। जिन लोगों के छह बच्चे हैं, उनसे भी सवाल पूछे जा रहे हैं जबकि संविधान में बच्चों की संख्या को लेकर कोई नियम नहीं है। BLO ने कहा कि वे सभी पेशे से स्कूल शिक्षक हैं और स्कूल की जिम्मेदारी के साथ यह अतिरिक्त और उलझाने वाला काम करना उनके लिए संभव नहीं है।

BLO के अनुसार आम लोगों के साथ अन्याय और अपनी पेशेवर जिम्मेदारी निभा पाने में असमर्थता के कारण उन्हें सार्वजनिक रूप से इस्तीफा देना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम से फरक्का ब्लॉक के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है।

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