काठमांडू, 28 मार्च। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन) की अगुआई में नई सरकार के शपथ लेने के साथ ही नेपाल की राजनीति में जबर्दस्थ उथल-पुथल मच गई है। दरअसल, सरकार की पहली बड़ी काररवाई में पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को गिरफ्तार कर लिया गया। बस फिर क्या था, ओली की गिरफ्तारी के विरोध में शनिवार को राजधानी काठमांडू की सड़कों पर दिन भर जमकर हंगामा और प्रदर्शन हुआ।
बबरमहल इलाके में स्थिति उस वक्त बेकाबू हो गई, जब पुलिस और ओली के समर्थकों के बीच सीधी भिड़ंत हो गई। प्रदर्शनकारी माइतीघर से नया बानेश्वर की तरफ बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें बबरमहल स्थित जिला अदालत के पास ही रोकने की कोशिश की। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया।
पत्थरबाजी के बाद पुलिस को करना पड़ा लाठीचार्ज
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थरबाजी शुरू कर दी, जिसके जवाब में पुलिस को जमकर लाठीचार्ज करना पड़ा। सिंहदरबार के ठीक सामने हुई इस झड़प की वजह से पूरे इलाके में तनाव फैला हुआ है और काठमांडू के कई हिस्सों में अब भी स्थिति काफी नाजुक बनी हुई है।
इसलिए हुई है ओली व पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखर की गिरफ्तारी
गौरतलब है कि ओली की गिरफ्तारी पिछले वर्ष जेन-जी (Gen-Z) प्रदर्शनों के दौरान हुई छात्रों की मौत के मामले में की गई है। इस मामले में केपी शर्मा ओली के साथ ही पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को भी गिरफ्तार किया गया है। इन दोनों ही बड़े नेताओं को छात्रों की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।
दरअसल, बालेन शाह की अध्यक्षता में हुई पहली कैबिनेट बैठक में एक बड़ा फैसला लिया गया था। सरकार ने जांच आयोग की उस रिपोर्ट को तुरंत लागू करने का आदेश दिया, जिसमें ओली और रमेश लेखक की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। इसी रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने इन दोनों नेताओं को गिरफ्तार किया गया है। फिलहाल, ओली के कार्यकर्ता अपने नेता की रिहाई की मांग को लेकर अड़े हुए हैं और नेपाल सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

