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UP Weather : यूपी में फिर सक्रिय हुआ मानसून, 21 जुलाई तक भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट; एडवाइजरी जारी

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लखनऊ, 20 जुलाई। उत्तर प्रदेश में एक बार फिर मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी पर बने सुस्पष्ट निम्न दबाव क्षेत्र और मानसूनी द्रोणी (Monsoon Trough) के दक्षिण की ओर खिसकने से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का दौर तेज हो गया है। मौसम विभाग ने 21 जुलाई तक कई जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि 24 जुलाई तक दक्षिणी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में भारी बारिश की यलो वार्निंग भी दी गई है।

रविवार सुबह से ही लखनऊ सहित प्रदेश के कई जिलों में रुक-रुक कर बारिश हो रही है। राजधानी में करीब 10 घंटे से जारी रिमझिम बारिश ने मौसम को सुहावना बना दिया है। लगातार हो रही वर्षा से किसानों के चेहरों पर भी खुशी लौट आई है, क्योंकि इससे खरीफ फसलों को पर्याप्त नमी मिलेगी।

मौसम विभाग के अनुसार, मानसूनी द्रोणी अब अमृतसर, करनाल, हरदोई, रांची और दीघा होते हुए उत्तरी-पूर्वी बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है। इसके प्रभाव से उत्तर प्रदेश में व्यापक वर्षा की अनुकूल परिस्थितियां बन गई हैं और आने वाले दिनों में कई इलाकों में अच्छी बारिश होने की संभावना है।

बख्शी का तालाब स्थित चंद्रभानु गुप्त कृषि महाविद्यालय के कृषि कीट विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह के अनुसार, मौजूदा बारिश धान, ज्वार, बाजरा, मक्का, रागी, सांवा, कोदो, उड़द और अरहर जैसी खरीफ फसलों के लिए बेहद लाभकारी है। इससे मिट्टी की गहराई तक नमी पहुंचेगी और फसलों की शुरुआती बढ़वार बेहतर होगी।

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि-

1- कद्दू, लौकी, करेला और तरोई जैसी बेल वाली सब्जियों के लिए मजबूत मचान तैयार करें।

2- खेतों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था बनाए रखें।

3- मिर्च, टमाटर और बैंगन की रोपाई जल्द पूरी करें।

4- भिंडी, ग्वार और लोबिया की बुआई समय पर करें।

डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह ने बताया कि धान की रोपाई के बाद शुरुआती 40 दिन फसल के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान खरपतवार और दीमक का प्रकोप उत्पादन को 30 से 40 प्रतिशत तक प्रभावित कर सकता है। इसलिए किसान नियमित निगरानी करें और समय पर नियंत्रण के उपाय अपनाएं।

विशेषज्ञों ने किसानों को मेड़बंदी मजबूत रखने और खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी सुनिश्चित करने की सलाह दी है। खासकर सब्जियों की खेती करने वाले किसानों को जलभराव से बचाव पर विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि फसलों को नुकसान न हो।

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