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पश्चिम एशिया संकट के बीच 2 भारतीय LPG टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की मंजूरी

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नई दिल्ली, 23 मार्च। पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच राहत की खबर यह है कि कुकिंग गैस ले जा रहे दो और भारतीय जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरते हुए अगले कुछ दिनों में भारत पहुंचेगे। इससे उम्मीद बंधी है कि भारत में LPG संकट कम होगा। शिप-ट्रैकिंग डेटा से पता चला है कि जहाज, जग वसंत और पाइन गैस, सुरक्षित रास्ते की मंजूरी मिलने के बाद, रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे हैं।

‘जग वसंत’ और ‘पाइन गैस’ अगले कुछ दिनों में भारत पहुंचेंगे

दोनों जहाज लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) ले जा रहे हैं, जिसका इस्तेमाल भारत में खाना पकाने के लिए बड़े पैमाने पर होता है। दोनों जहाजों ने सोमवार सुबह अपनी यात्रा शुरू की, यूएई तट से रवाना हुए और केशम और लारक द्वीपों के पास ईरान के तट के पास पहुंचे। जहाजों ने अपने ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए भारतीय मालिकाना हक का संकेत दिया, जो कई जहाजों द्वारा इस सेंसिटिव रास्ते पर चलने के लिए उठाया गया एक एहतियाती कदम था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यदि जहाजों की यात्रा बिना किसी रुकावट के जारी रहती है तो उनके सोमवार शाम तक ओमान की खाड़ी पहुंचने की उम्मीद है। होर्मुज जलडमरूमध्य से पूरा रास्ता तय करने में लगभग 14 घंटे लगते हैं।

यह सब कुछ ऐसे समय में हुआ है जब स्ट्रेट, जो तेल और गैस शिपमेंट के लिए एक अहम ग्लोबल रास्ता है, फरवरी के आखिर में इस इलाके में यूएस और इजरायली हमलों के बाद बढ़ते तनाव से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। तब से ईरान ने पानी के रास्ते से आने-जाने पर काफी हद तक रोक लगा दी है और बातचीत के बाद सिर्फ भारत समेत कुछ एशियाई देशों से जुड़े चुनिंदा जहाजों को ही गुजरने की इजाजत दी है।

शिपिंग पैटर्न से पता चलता है कि ईरान जहाजों को अपने समुद्र तट के किनारे से गुजरने का निर्देश देकर ट्रैफिक को कंट्रोल कर रहा है। इसके उलट, ओमान के पास के आम रास्ते में जोखिम देखा गया है। इस महीने की शुरुआत में एक जहाज पर हमला होने की खबर है।

‘जग वसंत’ और ‘पाइन गैस’ दोनों ने फरवरी के आखिर में लड़ाई बढ़ने से ठीक पहले फारस की खाड़ी में एंट्री की थी। जग वसंत ने कुवैत से एलपीजी लोड की जबकि पाइन गैस ने यूएई के रुवाइस से अपना माल उठाया। दोनों जहाज तनाव की वजह से इस इलाके में फंसे हुए थे। इस महीने की शुरुआत में, भारतीय झंडे वाले दो और एलपीजी कैरियर ने भी इसी तरह की यात्राएं सफलतापूर्वक पूरी की थीं।

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