वॉशिंगटन, 25 फरवरी। सदन में जब राष्ट्रपति ट्रंप अपना संबोधन दे रहे थे, तब वहां सुप्रीम कोर्ट के नौ में से चार जज भी मौजूद थे। उनकी ओर इशारा करते हुए ट्रंप ने कोर्ट के फैसले को “निराशाजनक” और “दुर्भाग्यपूर्ण” करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि देश में आए ‘बेहतरीन आर्थिक बदलावों’ का मुख्य श्रेय उनकी टैरिफ नीतियों को ही जाता है। हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ को रद्द कर दिया था।
अदालत का तर्क था कि संविधान के तहत टैरिफ लगाने का प्राथमिक अधिकार अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास। कोर्ट ने राष्ट्रपति की इस शक्ति को अवैध करार दिया था। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बावजूद ट्रंप पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने सदन में घोषणा की कि उनके टैरिफ “पूरी तरह स्वीकृत और परखे गए वैकल्पिक कानूनी प्रावधानों के तहत लागू रहेंगे”। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की यह राह इतनी आसान नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद ट्रंप के सामने एक बड़ी संवैधानिक बाधा खड़ी हो गई है। वर्तमान में लागू 15 फीसदी टैरिफ को बचाने के लिए अब उन्हें संसद (कांग्रेस) की मंजूरी की आवश्यकता होगी। यदि अमेरिकी संसद अगले 150 दिनों के भीतर इन टैरिफ को कानूनी मान्यता नहीं देती है, तो ये आयात शुल्क स्वतः ही समाप्त हो जाएंगे।

