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मकर संक्रांति से एक दिन पहले कम हो जाता है कुंड का पानी, रहस्यों से भरा है मंदार पर्वत पर मौजूद मधुसूदन मंदिर

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नई दिल्ली, 11 जनवरी। हिंदू धर्म में मंदार पर्वत का जिक्र बार-बार हुआ है। माना जाता है कि यही भगवान विष्णु का विश्राम स्थल रहा और यहीं पर समुद्र मंथन हुआ था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये पर्वत कहां है और समुद्र मंथन के बाद मंदार पर्वत का क्या हुआ था? बिहार के बांका में आज भी वो मंदार पर्वत मौजूद है, जिसका इस्तेमाल समुद्र मंथन के दौरान किया गया था। उस मंथन में अमृत के साथ विष भी निकला था। भागलपुर शहर से 50 किलोमीटर दूर स्थित 800 फीट ऊंची ग्रेनाइट की पहाड़ी, मंदार पर्वत, एक मनोरम दृश्य प्रस्तुत करती है और इसका संबंध अमृत मंथन की पौराणिक कथा से है।

किंवदंती के अनुसार, देवताओं ने इस पहाड़ी का उपयोग अमृत प्राप्त करने के लिए समुद्र मंथन करने में किया था। पौराणिक कथाओं में देवताओं द्वारा किए गए समुद्र मंथन के दौरान जिन-जिन बातों का जिक्र हुआ था, उसका रहस्य और साक्ष्य आज भी मौजूद हैं। पर्वत पर 10 मीटर से ज्यादा लंबे और मोटी रेखा के निशान है, जिन्हें वासुकी नाग का चिन्ह माना जाता है। मंथन के दौरान वासुकी नाग को मंदार पर्वत से लपेट कर मंथन किया गया था और उसके निशान आज भी मौजूद हैं।

इसी पहाड़ी पर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित मधुसूदन नाम का मंदिर भी मौजूद है, जो बहुत पुराना है। मंदिर के गर्भगृह में श्रीकृष्ण की काले पत्थर से बनी छोटी सी प्रतिमा स्थापित है। माना जाता है कि मधु नामक राक्षस का वध करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण मंदार पर्वत पर विश्राम करने के लिए रुके थे, जिसके बाद इस मंदिर की स्थापना की गई। मकर संक्रांति के मौके पर मंदिर में भव्य मेले का आयोजन होता है, जहां लाखों की संख्या में भक्त पहुंचते हैं। प्रशासन खुद भव्य मेले की व्यवस्था करता है और सुरक्षा से लेकर रंग-रोगन का कार्य करवाता है।

मकर संक्रांति के दिन मंदिर के बाहर मौजूद पापहरणी कुंड में भक्त स्नान भी करते हैं। इस कुंड की खास बात ये है कि मकर संक्रांति से एक रात पहले इसमें पानी का स्तर बहुत कम हो जाता है और कुंड में मौजूद शंख दिखने लगता है, लेकिन अगले ही दिन पानी का स्तर बढ़ जाता है। ये नजारा साल में सिर्फ एक बार मकर संक्रांति पर ही देखने को मिलता है। मधुसूदन मंदिर में हर साल भगवान मधुसूदन की रथ यात्रा निकाली जाती है, जिसमें भगवान श्री कृष्ण के लिए रथ तैयार किया जाता है। रथ खींचने के लिए उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक भक्तों को मंदार पर्वत पर स्थित पर देखा जाता है।

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