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अतीक व अशरफ के तीनों हत्यारों को 14 दिनों की जेल, पुलिस ने मांगी थी रिमांड, सुनवाई नहीं हो सकी

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लखनऊ, 16 अप्रैल। माफिया व पूर्व सांसद अतीक अहमद और उसके भाई व पूर्व विधायक खालिद अजीम उर्फ अशरफ अहमद की शनिवार रात हत्या करने वाले तीनों आरोपितों को कोर्ट ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस ने तीनों की कोर्ट से रिमांड मांगी थी। हालांकि रिमांड पर सुनवाई नहीं हो सकी।

गौरतलब है कि तीनों हमलावर मीडियाकर्मी के रूप में मोटर साइकिल से आए और अंधाधुंध गोलियां बरसाकर अतीक अहमद और अशरफ की काल्विन अस्पताल के पास हत्या कर दी थी। महज 22 सेकेंड में हुई 12 राउंड फायरिंग से आसपास का इलाका दहल गया था। अतीक व अशरफ की सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मी भी कुछ देर के लिए भाग खड़े हुए थे। हालांकि घटना के बाद तीनों हमलावरों ने सरेंडर कर दिया था और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर थाने ले गई थी।

तीनों आरोपितों – लवलेश तिवारी (बांदा), मोहित उर्फ सनी (हमीरपुर) और अरुण मौर्य (कासगंज-एटा) के खिलाफ रविवार की सुबह शाहगंज थाने में भारतीय दंड संहिता की धाराओं 302 (हत्या) और 307 (हत्या के प्रयास) के अलावा आयुध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। आरोपितों के पास से हत्या में प्रयुक्त पिस्टल और कारतूस व खोखे शानिवार रात ही बरामद कर लिए गए थे।

हत्याकांड की जांच के लिए 3 सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग गठित

इस बीच यूपी सरकार ने अतीक व अशरफ की हत्या की जांच के लिए तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन कर दिया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय के सेवानिवृत्त न्‍यायाधीश अरविंद कुमार त्रिपाठी द्वितीय इस जांच आयोग के अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं।

हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस अरविंद त्रिपाठी आयोग के अध्यक्ष नियुक्त

पूर्व पुलिस महानिदेशक सुबेश कुमार सिंह और सेवानिवृत्त जनपद न्यायाधीश बृजेश कुमार सोनी को बतौर सदस्‍य आयोग में शामिल किया गया है। आयोग को मामले की जांच के बाद दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी। राज्य के गृह विभाग ने जांच आयोग अधिनियम, 1952 के तहत आयोग का गठन किया है।

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