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कांग्रेस नेता ने दिया आपत्तिजनक बयान, महिलाओं को लेकर कर्नाटक सरकार पर लगाया गंभीर आरोप

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बेंगलुरु, 13 अगस्त। कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता और विधायक प्रियंक खड़गे ने बेहद आपत्तिजनक बयान दिया है। उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारी नौकरी के लिए लड़कों को घूस देना पड़ता है जबकि लड़कियों को किसी के साथ सोना पड़ता है। कांग्रेस नेता ने कथित भर्ती घोटालों की न्यायिक जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की जांच SIT से कराई जाए और सरकार फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन करे।

प्रियंक खड़गे ने आरोप लगाया कि कई सारे सरकारी पदों की भर्तियों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है, जिनमें बीजेपी शामिल है। उन्होंने कहा, ‘सरकार ने पदों को बेचने का फैसला किया है। अगर लड़कियां सरकारी नौकरी चाहती हैं तो उन्हें किसी के साथ सोना पड़ता है। लड़कों को सरकारी नौकरी के लिए घूस देना होता है। एक मंत्री ने लड़की से कहा कि नौकरी के लिए उसके साथ में सोना पड़ेगा। यह मामला सामने आते ही उसने रिजाइन कर दिया। मैं जो आरोप लगा रहा हूं, यह उसका सबूत है।’

कांग्रेस नेता ने कहा कि कर्नाटक पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (केपीटीसीएल) ने असिस्टेंट इंजीनियर, जूनियर इंजीनियर और सिविल इंजीनियर सहित कुल 1,492 पदों पर भर्ती की है। उन्होंने कहा, ‘गोकक में एक छात्र परीक्षा के दौरान ब्लूटूथ का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया। मुझे जो जानकारी मिली उसके मुताबिक, यह डील कुल 600 पदों के लिए की गई होगी। ऐसा संदेह है कि उन्होंने असिस्टेंट इंजीनियर के पद के लिए 50 लाख रुपये लिए और जूनियर इंजीनियर के पद के लिए 30 लाख रुपये लिए। यह संभावना है कि इस तरीके से कुल 300 करोड़ रुपये हासिल किए गए।’

प्रिंयक खड़गे ने कहा, ‘अगर सभी भर्ती परीक्षाओं में भ्रष्टाचार है तो गरीब और टैलेंटेड छात्र कहां जाएं। भ्रष्टाचारियों को यह पता है कि मामला सामने आने पर भी कुछ नहीं होगा। सराकर तीन लाख छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है, जिन्होंने KPTCL के पदों के लिए आवेदन दिया था।’

कांग्रेस विधायक ने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को लेकर भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बीजेपी राष्ट्रभक्ति का बिजनेस के तौर पर इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा, ‘पॉलिएस्टर झंडे के इस्तेमाल की इजाजत देने के लिए फ्लैग कोड में संशोधन किया गया है। इसकी सबसे बड़ी लाभार्थी रिलायंस कंपनी है, जिसके अधिकारियों को फ्लैग सेल्समैन बना दिया गया है। रेलवे कर्मचारियों के वेतन से उनकी मजदूरी काटकर उन्हें झंडे दिए जा रहे हैं।’

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