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तेलंगाना विधानसभा ने अनूठे बिल को दी मंजूरी : माता-पिता की अनदेखी करने वाले कर्मचारियों की सैलरी 15% कटेगी

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हैदराबाद, 29 मार्च। तेलंगाना विधानसभा ने माता-पिता की देखभाल के लिए कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने वाले एक अनूठे बिल को मंज़ूरी दे दी है। इसका मकसद बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल न करने वाले कर्मचारियों की सैलरी का एक हिस्सा काटना है।

बुजुर्ग माता-पिता को सिक्योरिटी देना इस कानून का मकसद : सीएम रेवंत रेड्डी

ETV Bharat की एक रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने सदन में यह बिल पेश करते हुए कहा कि माता-पिता अपनी सारी एनर्जी और रिसोर्स अपने बच्चों की परवरिश में लगा देते हैं, लेकिन बच्चे अक्सर स्वतंत्र होने के बाद अपने माता-पिता को नजरअंदाज कर देते हैं, और इस कानून का मकसद बुजुर्ग माता-पिता को सपोर्ट और सिक्योरिटी देना है।

रेवंत रेड्डी ने सदन को बताया कहा, ‘केंद्र सरकार ने 2007 में बुज़ुर्गों के लिए एक कानून बनाया था। इसके तहत माता-पिता को 10,000 रुपये से ज्यादा की आर्थिक मदद देने का कोई प्रावधान नहीं है। दुर्भाग्य से, कुछ बच्चों का व्यवहार ऐसा होता है कि उससे समाज में बदनामी होती है। अफसोस की बात है कि हमें एक ऐसे मामले में कानून बनाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जो असल में इंसानी प्यार और पारिवारिक रिश्तों से जुड़ा है।’

माता-पिता की देखभाल करने में असमर्थ व्यक्ति को समाज में रहने का नैतिक अधिकार नहीं

रेड्डी ने कहा, ‘कोई भी व्यक्ति जो अपने माता-पिता की देखभाल करने में नाकाम रहता है, उसे समाज से निकाल दिया जाना चाहिए। जो व्यक्ति अपने माता-पिता की देखभाल करने में असमर्थ है, उसे समाज में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। यह कानून न केवल सरकारी कर्मचारियों पर बल्कि चुने हुए जन प्रतिनिधियों पर भी लागू होता है।’

कानून में अहम बातें

अपील की रूपरेखा

विशेष परिस्थितियों में उपाय

यदि माता-पिता में से किसी एक की मौत हो जाती है तो पूरी मेंटेनेंस की रकम जिंदा माता-पिता को भेज दी जाएगी। यदि माता-पिता दोनों की मौत हो जाती है तो संबंधित कर्मचारी को जरूरी डॉक्यूमेंट के साथ तय अधिकारी को एक आवेदन देना होगा। वेरिफिकेशन के बाद, ऑफिसर 30 दिनों के अंदर सैलरी कटौती रद करने का ऑर्डर जारी करेगा। इस रूपरेखा के जरिए, कानून साफ-साफ और सही होने को दिखाता है।

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