बहादुरगढ़, 6 सितम्बर। हरियाणा के बहादुरगढ़ में मंगेशपुर ड्रेन टूटने से हालात बेहद गंभीर हैं। भारी बारिश और ड्रेन ओवरफ्लो होने से औद्योगिक क्षेत्र से लेकर आवासीय कॉलोनियां जलमग्न हैं। हालात से निबटने के लिए सेना की टीम बुलानी पड़ी है। आर्मी की डोट डिवीजन हिसार से आए 80 से ज्यादा जवान SDRF के 40 जवानों के साथ राहत और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं।
मारुति कम्पनी के स्टॉकयार्ड में खड़ी 150 से ज्यादा गाड़ियां पानी में डूबीं
ड्रेन के टूटने से शहर के विवेकानंद नगर और छोटूराम नगर पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। घरों में चार से पांच फीट तक पानी घुस चुका है, जिससे लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। औद्योगिक क्षेत्र में भी पानी भर गया है। मारुति कम्पनी के स्टॉकयार्ड में खड़ी 150 से ज्यादा गाड़ियां पानी में डूब गई हैं। इससे करोड़ों का नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
सेना और SDRF की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटीं
सेना और SDRF की टीमें आठ नौकाओं के साथ मौके पर राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। उनका मुख्य ध्यान मंगेशपुर ड्रेन के कटाव को रोकने और तटबंध को मजबूत करने पर है। तेज बहाव के कारण दिक्कतें आ रही हैं, लेकिन समाधान के लिए युद्धस्तर पर काम जारी है। सेना ने लोहे के जालीनुमा बड़े बॉक्स तैयार कर कटाव के पास लगाए हैं, जिनमें प्लास्टिक बैग्स में मिट्टी भरकर डाली जा रही है ताकि पानी के बहाव को रोका जा सके।
सिंचाई विभाग और नगर परिषद के 100 से ज्यादा कर्मचारी भी तैनात
सिंचाई विभाग और नगर परिषद के 100 से ज्यादा कर्मचारी भी मौके पर तैनात हैं। कर्मचारियों की सुरक्षा और सेहत को देखते हुए सेना ने मेडिकल कैंप लगाया है। वहीं, सिंचाई विभाग की ओर से चाय, बिस्कुट, फल और सूखे राशन जैसी सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। सिंचाई विभाग के एक्सईएन ईशान सिवाच खुद राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आज ड्रेन का कटाव पूरी तरह बंद कर लिया जाएगा और हालात कुछ हद तक काबू में आ जाएंगे।
हिसार में घग्गर ड्रेन टूटी, 1500 एकड़ फसल जलमग्न
वहीं राज्य के हिसार जिले में घग्गर ड्रेन ने एक बार फिर विकराल रूप ले लिया है। तड़के करीब 4 बजे गुड़िया खेड़ा के पास मोडिया खेड़ा गांव में ड्रेन का तटबंध टूट गया। कुछ ही घंटों में दरार 80 फीट तक फैल गई और पानी तेजी से खेतों में घुस गया। इस हादसे से करीब 1500 एकड़ फसल पूरी तरह डूब गई। ग्रामीणों के अनुसार दर्जनों ढाणियों में पानी का स्तर 6 से सात फीट तक पहुंच गया है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। किसानों की मेहनत से तैयार पक्की फसलें बर्बाद हो गईं और अब वे सरकार से मुआवजे की मांग कर रहे हैं.
मौके पर डेरा सच्चा सौदा के स्वयंसेवक और ग्रीन एस वेलफेयर फोर्स पहुंची और तटबंध को बांधने का प्रयास शुरू किया। उनका कहना है कि पानी का बहाव तेज है और कई जगह गहराई आठ से नौ फीट तक है, फिर भी कोशिशें जारी हैं। राहत दलों को उम्मीद है कि देर शाम तक कटाव को पूरी तरह से बंद कर लिया जाएगा।

