प्रयागराज, 20 जनवरी। प्रयागराज माघ मेला 2025-26 के दौरान मौनी अमावस्या के दिन पालकी पर बैठकर संगम स्नान करने के लिए जाते वक्त उपजे विवाद के बाद मेला विकास प्राधिकरण ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के पद को लेकर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
माघ मेला विकास प्राधिकरण ने रविवार को आधी रात में शंकराचार्य शिविर में नोटिस भेजी और 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा है। नोटिस में प्राधिकरण ने कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन मामले में पारित आदेश के बावजूद स्वयं को ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य घोषित करना न्यायालय के आदेश की अवहेलना की श्रेणी में आता है।
वहीं शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के वकील पीपी मिश्रा ने कहा कि प्रयागराज मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस के माध्यम से जवाब मांगा था। नोटिस दुर्भाग्यपूर्ण है और बदले की भावना से जारी की गई है। सबको धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है।
सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दिया कोई आदेश
वकील पीपी मिश्रा ने कहा, ‘हम लोग पहले इन अधिकारियों को नोटिस जारी करेंगे। उनके उत्तर की अपेक्षा है। वे यदि यह कहते हैं कि हमसे भूल हुई तो हम काररवाई न करने का भी विचार करेंगे। लेकिन यदि जवाब नहीं प्राप्त होता तो सीधा इनके ऊपर कारवाई सुप्रीम कोर्ट में केस करेंगे। हम राज्य सरकार से, गवर्नर से इनके ऊपर अलग से सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की अपील करेंगे। सरकार नहीं करती है तो हम न्यायालय में जाएंगे। बिना सुप्रीम कोर्ट के आदेश के यह अधिकारी उनका अनुपालन करने चले हैं।’
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना का आरोप
हालांकि मेला प्रशासन का दावा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के पद पर पट्टाभिषेक पर अग्रिम आदेशों तक रोक है। इसके बावजूद माघ मेले में लगे शिविर के बोर्ड में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के नाम के सम्मुख शंकराचार्य लिखा गया है। मेला प्रशासन ने नोटिस में लिखा है कि यह काम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना है।

