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राहुल गांधी को झटका : दोहरी नागरिकता के आरोप पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दिए जांच के आदेश

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लखनऊ, 17 अप्रैल। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस सासंद राहुल गांधी को इलाहाबाद हाई कोर्ट से शुक्रवार को झटका लगा, जब अदालत ने दोहरी नागरिकता (Dual Citizenship) रखने का उनपर लगे आरोप की जांच के आदेश दे दिए। हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि या तो खुद जांच करे या फिर इस मामले को किसी केंद्रीय एजेंसी को सौंप दे। यह आदेश भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर की याचिका पर दिया गया।

याचिकाकर्ता शिशिर ने लखनऊ की विशेष MP/MLA अदालत के गत 28 जनवरी के फैसले को चुनौती दी थी। उस अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली उनकी अर्जी खारिज कर दी थी। निचली अदालत ने कहा था कि नागरिकता से जुड़े मुद्दों पर फैसला करने का अधिकार उसके पास नहीं है।

याचिकाकर्ता का आरोप

कर्नाटकवासी याचिकाकर्ता ने राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम की धाराओं के तहत FIR दर्ज कराने और गहन जांच कराने की मांग की है। शुरू में यह शिकायत रायबरेली की विशेष MP/MLA अदालत में दायर की गई थी। 17 दिसम्बर, 2025 को हाई कोर्ट ने मामले को लखनऊ ट्रांसफर कर दिया। जब लखनऊ की अदालत ने भी याचिका खारिज कर दी, तब याचिकाकर्ता हाई कोर्ट पहुंच गए।

राहुल की दोहरी नागरिकता को लेकर विवाद काफी पुराना

कई बार उठ चुका है ये मुद्दा

राहुल गांधी और कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है

हालांकि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ने इन आरोपों को हमेशा सिरे से खारिज किया है। कांग्रेस ने दलील दी कि कम्पनी के दस्तावेजों में नागरिकता को ब्रिटिश लिखना केवल एक ‘टाइपिंग की एरर’ था। पार्टी ने कम्पनी के ‘सर्टिफिकेट ऑफ इनकॉर्पोरेशन’ पेश किए, जिसमें राहुल गांधी की नागरिकता ‘भारतीय’ (Indian) दर्ज थी।

राहुल गांधी ने इन आरोपों को अपनी छवि खराब करने की कोशिश बताया है। एक बार उन्होंने सार्वजनिक तौर पर चुनौती देते हुए कहा था, ‘मेरे पास दिखाने के लिए कोई दूसरा पासपोर्ट नहीं है। यदि आरोप सही हैं, तो मुझे जेल में डाल दें।’

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