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ममता बनर्जी को झटका : बागी गुट के विधायक ऋतब्रत बनर्जी बने नेता प्रतिपक्ष, विधानसभा स्पीकर ने दी मंजूरी

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कोलकाता, 3 जून। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बड़ी पराजय के बाद अचानक बिखरती प्रतीत हो रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) की अध्यक्ष ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगा, जब विधानसभा स्पीकर ने बुधवार को बागी गुट के विधायक ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष (LoP) के रूप में मान्यता दे दी।

ऋतब्रत ने 60 विधायकों के समर्थन का दावा किया

ऋतब्रत बनर्जी ने एक बयान में कहा, ‘तृणमूल विधायक दल में 58 विधायकों की टीम है, जिन्होंने पार्टी चुनाव चिह्न पर जीत हासिल की, दो अन्य विधायक भी हमारे खेमे में शामिल हो सकते हैं।’ उन्होंने बताया कि जावेद खान, संदीपन साहा, सबीना यास्मीन और शिउली साहा तृणमूल कांग्रेस विधायक दल के उपनेता होंगे।

उन्होंने आगे कहा, ‘हम बंगाल सरकार की उन नीतियों का विरोध करेंगे, जो हमें गलत लगती हैं, लेकिन बेवजह विरोध नहीं करेंगे।’ वहीं, तृणमूल विधायक अखरुज्जमां ने कहा कि विपक्ष के नेता के चुनाव में पार्टी नेतृत्व ने प्रक्रिया का पालन नहीं किया।

इस बीच टीएमसी से निकाले गए नेता संदीपन साहा ने कहा, ‘हमने अभी-अभी चिट्ठी सौंपी है। नेता प्रतिपक्ष (LoP) के लिए तय कमरा आधिकारिक तौर पर अलॉट कर दिया गया है। नेता प्रतिपक्ष अभी वहीं बैठे हैं।’

ममता बनर्जी हमारी सलाहकार बनी रहें : संदीपन साहा

संदीपन साहा ने यह भी कहा, ‘हमारी इच्छा है कि ममता बनर्जी हमारी सलाहकार बनी रहें और हमें अपनी सलाह देती रहें, ताकि हम नेता प्रतिपक्ष और मुख्य सचेतक के साथ मिलकर विधानसभा के अंदर पार्टी को प्रभावी ढंग से चला सकें।’

पार्टी की बुरी हालत के लिए अभिषेक जिम्मेदार

हालांकि संदीपन ने ममता के भतीजे और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी को निशाने पर लेते हुए कहा कि पार्टी की जो बुरी हालत आज हो गई है, कुछ हद तक वह अभिषेक बनर्जी की नाकामी है। आखिर, यदि जब सब कुछ अच्छा होता है तो आप उसका श्रेय लेते हैं तो जब चीजें गलत होती हैं तो आपको उसकी जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए।

प्रसून बनर्जी बोले – भाजपा के खिलाफ हमारा राजनीतिक संघर्ष जारी रहेगा

दूसरी तरफ टीएमसी नेता प्रसून बनर्जी ने कहा ने कहा, ‘भाजपा के खिलाफ हमारा राजनीतिक संघर्ष बिना रुके जारी रहेगा। हमारी वैचारिक लड़ाई चलती रहेगी। इसके अलावा, जहां भी आवश्यक होगा, एक जिम्मेदार विपक्ष के रूप में सरकार के साथ हमारा सहयोग भी जारी रहेगा।’

प्रसून बनर्जी ने कहा, ‘आज आप जो देख रहे हैं, वह कोई असाधारण बात नहीं है। यह केवल इस बात का प्रतीक है कि अधिकतर विधायकों ने सामूहिक रूप से चार नेताओं का चुनाव किया है, जो विधानसभा में हमारा प्रतिनिधित्व करेंगे और हमारा नेतृत्व करेंगे।’

उन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में, सत्ताधारी सरकार और विपक्ष दोनों का सदन में उपस्थित होना, संवाद करना और रचनात्मक बहसों में भाग लेना आवश्यक है। इसलिए, विधानसभा के सभी विधायकों ने सामूहिक रूप से यह कदम उठाने का निर्णय लिया।

दिन में विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात

इससे पहले दिन में सदन में विपक्षी खेमे के शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदलने वाले एक कदम के तहत, ऋतब्रत बनर्जी ने बागी विधायक संदीपन साहा और अन्य असंतुष्ट विधायकों के साथ विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात की और 58 विधायकों के हस्ताक्षर वाले समर्थन पत्र सौंपे। बागी गुट ने एक नए नेतृत्व ढांचे का भी प्रस्ताव रखा था, जिसमें ऋतब्रत बनर्जी को विपक्षी विधायक दल का नेता, जावेद खान, संदीपन साहा और शिउली साहा को उपनेता तथा रघुनाथगंज के विधायक अखरुज्जमां को मुख्य सचेतक नामित किया।

सीएम शुभेंदु अधिकारी की बैठक में पहुंचे टीएमसी के बागी विधायक

वहीं पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में दिन में हुई प्रशासनिक समीक्षा बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले तृणमूल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इस घटनाक्रम को विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद अब तक के सबसे बड़े आंतरिक विद्रोह का सामना कर रही मुख्य विपक्षी पार्टी तृणमूल के भीतर एक नए राजनीतिक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।

तृणमूल विधायक दल में संभावित विभाजन की आहट के बीच ममता बनर्जी की पुरानी वफादार मानी जाने वाली विधायक नयना बंदोपाध्याय, कोलकाता के महापौर फिरहाद हकीम, अशोक देव और कुणाल घोष राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ में आयोजित इस प्रशासनिक बैठक में शामिल हुए।

ममता के धरने से बनाई थी दूरी

महत्वपूर्ण बात यह है कि बागियों की इस बैठक में शामिल होने वाले विधायकों में से कोई भी मंगलवार को मध्य कोलकाता में ममता बनर्जी के धरने में नजर नहीं आया था, जो पार्टी के पारंपरिक नेतृत्व और असंतुष्ट गुट के बीच बढ़ती खाई को साफ दर्शाता है। दिलचस्प तथ्य यह है कि हकीम, बंदोपाध्याय, देव और घोष सहित कालीघाट (ममता बनर्जी के आवास) खेमे से जुड़े कई नेताओं ने विधानसभा में हुई बागियों की बैठक से दूरी बनाए रखी, लेकिन वे मुख्यमंत्री की प्रशासनिक बैठक में जरूर पहुंचे।

इससे कुछ ही दिन पहले, वरिष्ठ तृणमूल सांसद काकोली घोष दस्तीदार और पार्टी के छह विधायकों ने कल्याणी में शुभेंदु अधिकारी द्वारा बुलाई गई प्रशासनिक समीक्षा बैठक में हिस्सा लिया था। इससे विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद विपक्षी खेमे के भीतर बदलते समीकरणों को लेकर कयासबाजी शुरू हो गई थी।

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