लखनऊ 10 मई। उत्तर प्रदेश की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज रविवार दोपहर साढ़े 3 बजे अपने मंत्रिमंडल का दूसरा विस्तार करने जा रहे हैं। लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले हुए पहले विस्तार के बाद, अब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखकर इस फेरबदल को अंजाम दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार शाम राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात कर नए मंत्रियों की अंतिम सूची सौंप दी थी। आज होने वाले इस शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने वाले 6 नए मंत्रियों के नाम तय हो चुके हैं, जिनमें जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को विशेष प्राथमिकता दी गई है।
इस विस्तार में सबसे बड़ा और चर्चित नाम समाजवादी पार्टी से बगावत करने वाले रायबरेली की ऊंचाहार सीट से विधायक मनोज पांडेय का है। वह सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं और उन्हें अवध व पूर्वांचल क्षेत्र में ब्राह्मणों का बड़ा नेता माना जाता है। हाल ही में ब्राह्मण समाज के भीतर विभिन्न मुद्दों को लेकर उपजी नाराजगी को दूर करने के लिए भाजपा ने मनोज पांडेय को अपने पाले में लाकर मंत्रिमंडल में जगह देने का फैसला किया है। मनोज पांडेय के अलावा सरकार और संगठन में मजबूत पकड़ रखने वाले कई अन्य चेहरों को भी इस बार मौका मिल रहा है:
भूपेंद्र सिंह चौधरी: यूपी भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट समुदाय का एक बड़ा चेहरा हैं। उनके शामिल होने से जाट वोट बैंक को मजबूती मिलेगी।
कृष्णा पासवान: फतेहपुर की खागा विधानसभा सीट से जुझारू दलित महिला चेहरा हैं। उन्होंने हाल ही में अपने क्षेत्र में जमीनी स्तर पर सक्रियता दिखाकर काफी सुर्खियां बटोरी थीं।
सुरेंद्र दिलेर: हाथरस के मजबूत राजनीतिक परिवार से आने वाले सुरेंद्र दिलेर अलीगढ़ की खैर सीट से विधायक हैं और पार्टी के युवा दलित चेहरों में गिने जाते हैं।
हंसराज विश्वकर्मा: वाराणसी से विधान परिषद सदस्य (MLC) हैं। पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से आने वाले विश्वकर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में भाजपा को बड़ी जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई है।
कैलाश सिंह राजपूत: कन्नौज की तिर्वा विधानसभा सीट से विधायक कैलाश राजपूत को भी उनके मजबूत क्षेत्रीय प्रभाव को देखते हुए मंत्रिमंडल में शामिल किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में मंत्रियों की अधिकतम संख्या 60 हो सकती है, जबकि वर्तमान में मुख्यमंत्री को मिलाकर कुल 54 मंत्री हैं। खाली पड़ी इन सभी 6 सीटों को भरकर योगी सरकार ने 1 ब्राह्मण, 3 ओबीसी और 2 दलित चेहरों को शामिल कर 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए अपने समीकरण पूरी तरह दुरुस्त कर लिए हैं। वहीं, इस विस्तार पर तंज कसते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया है कि क्या यह पर्ची दिल्ली से आई है, जिससे मुख्यमंत्री की शक्तियों में बदलाव की चर्चाएं गर्म हैं।

