बैंकॉक, 16 मई। दो बार (2019 व 2024) के पूर्व चैम्पियन सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी व चिराग शेट्टी की ख्यातिनाम भारतीय जोड़ी ने शनिवार को यहां तीन गेमों के रोमांचक मुकाबले में मलेशियाई गोह जे फेइ व नूर इजुद्दीन को हराकर तीसरी बार थाईलैंड ओपन सुपर 500 बैडमिंटन टूर्नामेंट के पुरुष युगल फाइनल में प्रवेश कर लिया।
Letting the numbers do the talking! 🔢📈
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कोर्ट नंबर एक पर भारतीय टीम को 82 मिनट तक जूझना पड़ा
BWF विश्व रैंकिंग में पूर्व विश्व नंबर एक व मौजूदा समय चौथे नंबर पर काबिज सात्विक व चिराग ने निमिबुत्र स्टेडियम के कोर्ट नंबर एक पर खेले गए दिन के दूसरे मैच में नौवीं रैंकिंग वाली मलेशियाई जोड़ी को 82 मिनट की कश्मकश के बाद 19-21, 22-20, 21-16 से हराया। इसके साथ ही भारतीय सितारों का तीसरी सीड मलेशियाई जोड़ी के खिलाफ मैच रिकॉर्ड 8-2 हो गया।
Top seeds Rankireddy/Shetty 🇮🇳 rival Goh/Izzuddin 🇲🇾 for a spot in the finals.#BWFWorldTour #ThailandOpen2026 pic.twitter.com/amDXpxNXyk
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फाइनल में इंडोनेशियाई टीम से होगी मुलाकात
बैंकॉक में तीसरी व मौजूदा सत्र की पहली उपाधि के लिए प्रयासरत टॉप सीड चिराग-सात्विक का अब गैर वरीय इंडोनेशियाई लियो रोली कार्नांडो व डेनियल मार्टिन से सामना होगा, जिन्होंने हि जि तिंग व रेन शियांग यू की चीनी जोड़ी को 44 मिनट में 21-15, 21-18 से परास्त किया।
One step from glory.🏆
Satwik-Chirag with a come-from-behind victory against Goh/Izzuddin to book their place in the Thailand Open 2026 MD Final!
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उल्लेखनीय है कि डेनमार्क में थॉमस कप में कांस्य पदक जीतने के बाद भी बैडमिंटन को भारत में तरजीह वप्रशंसा नहीं मिलने को लेकर अपने बयान से सात्विक व चिराग हाल ही में चर्चा में रहे थे। उन्होंने हालांकि बाहरी शोर से किनारा करते हुए शानदार प्रदर्शन करते फाइनल में प्रवेश किया।
चोटों से संघर्ष और थॉमस कप जीत को श्रेष्ठ प्रदर्शन का श्रेय
मलेशियाई टीम पर करीबी जीत दर्ज करने के बाद सात्विक व चिराग शेट्टी ने कहा कि वर्षों से चोटों से जूझते रहने और नाकामियों ने उन्हें मानसिक तौर पर दृढ बना दिया है। गौरतलब है कि एशियाई खेल चैम्पियन इस भारतीय जोड़ी को सात्विक के कंधे की चोट के कारण एशियाई चैम्पियनशिप और स्विस ओपन जैसे टूर्नामेंटों से नाम वापस लेना पड़ा था।
चोटों से लड़ने की अब हमें आदत पड़ गई है – सात्विक
सात्विक ने BWF से कहा, ‘अब हमें इसकी आदत हो गई है । एक दौर था, जब हमें लगता था कि ऐसा क्योx हो रहा है, लेकिन बाद में समझ में आया कि खेल में यह होगा ही। हम काफी आक्रामक खेलते हैं तो चोट तो लगेगी ही। मैंने अब इनसे निबटना सीख लिया है। इससे सामंजस्य बैठाना, संयम रखना और एक दूसरे का साथ देना अहम है । जब मैं पूरी तरह से फिट नहीं हूं तो मेरा जोड़ीदार मेरा पूरा साथ देता है। कोच भी चोटों से बखूबी निबटते हैं।’
‘एक बार पोडियम पर रहने से बदल सकती है जिंदगी’
स्टार शटलर ने थॉमस कप 2022 में भारत की ऐतिहासिक जीत को टीम की मानसिकता बदलने और आत्मविश्वास बढाने का श्रेय दिया। उन्होंने कहा, ‘मैं थॉमस कप (डेनमार्क) के दौरान खिलाड़ियों से कहता था कि एक बार पोडियम पर रहने से किसी की जिंदगी बदल सकती है। हमारे साथ भी 2022 थॉमस कप के बाद यही हुआ। उसके बाद हमने मुड़कर नहीं देखा। हमारी सोच बदल गई और हम अधिक आत्मविश्वास के साथ खेलने लगे।’

