Site icon hindi.revoi.in

बिहार की राजनीति में सम्राट चौधरी नया इतिहास लिखने को तैयार, बुधवार को भाजपा के पहले सीएम की शपथ लेंगे

Social Share

पटना, 14 अप्रैल। बिहार के उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी उम्मीदों के अनुरूप राज्य की राजनीति में नया इतिहास लिखने को तैयार हैं। दरअसल, मंगलवार को यहां उन्हें सर्वसम्मति से भाजपा विधायक दल का नेता चुन लिया गया, जिससे उनके मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया। वह बुधवार को पूर्वाह्न 11 बजे राज्य के पहले भाजपाई मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे।

नीतीश कुमार ने सीएम पद से इस्तीफा देने के साथ मंत्रिमंडल भंग किया

इसके पूर्व नीतीश कुमार ने आज ही बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। कई कार्यकाल में लगभग 21 वर्षों तक मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने वाले नीतीश ने लोकभवन जाकर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन को इस्तीफा सौंपा।

भावुक पोस्ट में बोले -बिहार की नई सरकार को पूरा सहयोग व मार्गदर्शनरहेगा

बीते दिनों राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण कर चुके नीतीश ने सीएम पद से इस्तीफा देने के साथ मंत्रिमंडल भंग कर दिया। उन्होंने एक्स पर एक भावुक बयान जारी कर सभी का धन्यवाद किया और कहा कि बिहार की नई सरकार को उनका ‘पूरा सहयोग और मार्गदर्शन’ रहेगा।

कुल मिलाकर देखें तो अब सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के साथ बिहार की राजनीति में एक नया दौर शुरू होने जा रहा है, जिसमें भाजपा पहली बार सीधे तौर पर राज्य की सत्ता की कमान संभालती नजर आएगी। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार यह बदलाव सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन नहीं बल्कि राज्य की सत्ता संरचना में बड़े फेरबदल का संकेत है। पिछले वर्ष विधानसभा चुनाव में एनडीए की बड़ी जीत के बाद सम्राट चौधरी को गृह विभाग सौंपा गया था। यह पहली बार था, जब दो दशकों बाद यह अहम मंत्रालय भाजपा के पास गया।

सम्राट का राजनीतिक सफर : राजद से भाजपा तक

मुंगेर जिले के तारापुर के पास लखनपुर गांव में जन्मे सम्राट चौधरी ने 1990 में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ राजनीति में कदम रखा। उनके पिता शकुनी चौधरी क्षेत्रीय राजनीति के जाने-माने नेता व मंत्री रहे हैं। 1999 में राबड़ी देवी सरकार में सम्राट चौधरी को कृषि मंत्री बनाया गया। हालांकि उस समय वह विधायक या विधान पार्षद नहीं थे। तब उम्र को लेकर विवाद के चलते उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद 2000 में उन्होंने परबत्ता सीट से चुनाव जीता और पार्टी में धीरे-धीरे मजबूत होते गए। 2010 तक वे विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक बन गए।

दल-बदल के साथ लगातार बढ़ता कद

सम्राट चौधरी ने 2014 में बड़ा राजनीतिक दांव खेलते हुए राजद छोड़कर जनता दल (यूनाइटेड) का दामन थाम लिया और कई विधायकों को भी अपने साथ ले आए। जीतन राम मांझी के मुख्यमंत्री कार्यकाल में उन्हें शहरी विकास मंत्री बनाया गया। फिर 2017 में भाजपा में शामिल हुए और तेजी से संगठन में ऊपर बढ़े। 2023 में उन्हें बिहार भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया।

विवाद और आरोप

हालांकि सम्राट चौधरी का राजनीतिक करिअर विवादित भी रहा है और 1995 के तारापुर कांड से तो उनका नाम भी जुड़ा, जिसमें एक ग्रेनेड हमले में कांग्रेस उम्मीदवार सच्चिदानंद सिंह की मौत हुई थी। हालांकि सबूतों के अभाव में वह आरोप मुक्त करार दिए गए थे। हाल के चुनावों के दौरान प्रशांत किशोर ने उन पर उम्र छिपाने जैसे आरोप लगाए, जिन्हें चौधरी ने खारिज किया। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत ने उन्हें कभी नाबालिग मानने के दावे को स्वीकार नहीं किया।

भाजपा की रणनीति और भविष्य

कुल मिलाकर देखें तो सम्राट चौधरी का उभार भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत पार्टी ओबीसी वोट बैंक को मजबूत करना चाहती है। वह कोइरी समुदाय से आते हैं, जो बिहार की राजनीति में अहम भूमिका रखता है।

वर्ष 2024 में नीतीश कुमार के फिर से एनडीए में लौटने के बाद चौधरी को उप मुख्यमंत्री बनाया गया और उन्हें वित्त समेत कई अहम विभाग दिए गए, 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने तारापुर सीट से बड़ी जीत दर्ज की। गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी और अब विधायक दल के नेता के रूप में उनकी ताजपोशी यह संकेत देती है कि भाजपा उन्हें राज्य की राजनीति में बड़े नेतृत्व के रूप में तैयार कर रही है।

Exit mobile version