लखनऊ, 26 फरवरी। उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह और उनके करीबियों के लखनऊ स्थित आवासों पर कल से जारी आयकर टीम का छापा गुरुवार को समाप्त हो गया। विपुलखंड स्थित विधायक के घर से 10 करोड़ की नकदी बरामद हुई है। हालांकि उनके कार्यालय और अन्य स्थानों पर आयकर टीम की काररवाई अब भी जारी है।
उल्लेखनीय है कि बलिया की रसड़ा विधानसभा सीट से बसपा विधायक उमाशंकर सिंह एवं उनके करीबियों के ठिकानों पर बुधवार को आयकर विभाग ने छापेमारी की बड़ी काररवाई की। लखनऊ, बलिया, सोनभद्र, कौशांबी, मिर्जापुर और प्रयागराज में 30 से अधिक स्थानों पर एक साथ छापे मारे गए। 50 से ज्यादा अधिकारियों की टीमें पूर्वाह्न 11 बजे से देर रात तक जांच में जुटी रहीं।
आयकर विभाग की तीन टीमों ने लखनऊ के गोमतीनगर में विपुल खंड स्थित उमाशंकर सिंह के आवास, उनकी कम्पनी छात्रशक्ति कंस्ट्रक्शन कम्पनी के कॉरपोरेट ऑफिस और वजीर हसन रोड पर करीबी ठेकेदार फैजी के ठिकानों को खंगाला। इसके अलावा सोनभद्र में साईं राम इंटरप्राइजेज कम्पनी के नाम से खनन का कारोबार करने वाले उमाशंकर सिंह के करीबी सीबी गुप्ता समेत कई खनन कारोबारियों के ठिकानों को खंगाला गया। छापेमारी में टैक्स चोरी और बेनामी संपत्तियों से जुड़े अहम सुराग मिले।
खनन घोटाले में आया था नाम
उमाशंकर सिंह छात्रशक्ति कंस्ट्रक्शन कम्पनी और साईं राम इंटरप्राइजेज के नाम से सड़क और खनन से जुड़े कार्य करते हैं। बीते वर्ष सीएजी (कैग) ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि सोनभद्र में अवैध खनन कार्यों से करीब 60 करोड़ रुपये की राजस्व की हानि हुई थी। माना जा रहा है कि सीएजी की इस रिपोर्ट के बाद ही उमाशंकर सिंह और उनके करीबियों के ठिकानों को खंगाला गया।
बाराती बनकर पहुंचे थे अधिकारी
बलिया में विधायक उमाशंकर के आवास पर छापा मारना आयकर विभाग के लिए आसान नहीं था। ऐसे में टीम सरकारी गाड़ियों के बजाय बारातियों के अंदाज में पहुंची। वाहनों पर महेंद्र कुमार संग संगीता कुमारी नाम के शादी वाले स्टीकर लगा दिए गए ताकि किसी को शक न हो। इसी रणनीति की आड़ में अधिकारी बिना शोर-शराबे के सीधे आवास तक पहुंच गए और काररवाई शुरू कर दी।
कई ब्यूरोक्रेट्स निशाने पर
आयकर छापे में सोनभद्र और मिर्जापुर में बीते कुछ वर्षों के दौरान हुए अवैध खनन से जुड़े अहम दस्तावेज हाथ लगे हैं, जिसमें कई अधिकारियों के नाम और उनको दी जाने वाली रकम का जिक्र है। आयकर विभाग को शक है कि खनन कारोबार में कई ब्यूरोक्रेट्स की काली कमाई का निवेश किया गया है, जिसके सुराग जुटाए जा रहे हैं।

