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दिल्ली जिमखाना क्लब विवाद में रिटायर्ड IAS खेमका की एंट्री : केंद्र के फैसले का किया समर्थन, तो किरण बेदी ने जताया विरोध, जानें पूरा मामला

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चंडीगढ़, 26 मई। देश के सबसे प्रतिष्ठित क्लबों में शुमार दिल्ली जिमखाना क्लब की लीज समाप्त करने के केंद्र सरकार के फैसले पर अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में बहस तेज हो गई है। अपनी बेबाक कार्यशैली के लिए देश भर में मशहूर हरियाणा कैडर के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने इस विवाद में कूदते हुए केंद्र सरकार के फैसले का खुलकर समर्थन किया है। खेमका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार के इस कदम को एक बड़ा और साहसिक फैसला करार दिया है।

उनका मानना है कि दिल्ली के प्राइम लोकेशन पर स्थित यह क्लब करीब 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की बेहद कीमती सार्वजनिक जमीन पर बना हुआ है, इसलिए सार्वजनिक संपत्ति और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में सरकार का यह कदम बेहद महत्वपूर्ण है। रिटायर्ड आईएएस अशोक खेमका ने अपने बयान में इस फैसले के विरोध की वजहों पर भी तीखा प्रहार किया है। उन्होंने लिखा कि इस फैसले का विरोध होना स्वाभाविक है क्योंकि क्लब से जुड़े कई प्रभावशाली, रसूखदार और संपन्न लोग लंबे समय से इस बेशकीमती सरकारी जमीन का लाभ लेते रहे हैं।

उन्होंने साफ कहा कि समाज के जमे-जमाए अमीर लोग इस फैसले का विरोध करेंगे, लेकिन अब असली मुद्दा यह देखने का है कि क्या सरकार अपने इस साहसिक फैसले पर मजबूती से कायम रहती है या फिर रसूखदारों के दबाव में आकर पीछे हट जाती है। खेमका की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक इस बात पर बहस छिड़ गई है कि सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल किस हद तक पारदर्शी और जनहित के अनुरूप होना चाहिए। दिलचस्प बात यह है कि इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी के अधिकतर फैसलों का समर्थन करने वाली देश की पहली महिला आईपीएस और पूर्व राज्यपाल किरण बेदी ने केंद्र सरकार के रुख का विरोध किया है।

किरण बेदी ने ‘एक्स’ पर सरकार के इस प्रपोजल की कड़ी आलोचना करते हुए इसे बेहद दुखद और बुरा बताया है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि सरकार इस फैसले पर दोबारा विचार करेगी। दरअसल, दिल्ली जिमखानाक्लब लंबे समय से केंद्र सरकार की जमीन पर संचालित हो रहा है। हाल ही में सरकार ने इसकी लीज समाप्त करने और इसके संचालन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सरकार का तर्क है कि इस सार्वजनिक जमीन का इस्तेमाल जनहित में होना चाहिए, जबकि विरोध करने वालों का कहना है कि क्लब की ऐतिहासिक विरासत और सामाजिक पहचान को बनाए रखना जरूरी है।

अशोक खेमका के इस बयान के कई राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं क्योंकि वे अपने 34 साल के प्रशासनिक करियर में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के लिए जाने जाते हैं। वर्ष 1991 बैच के आईएएस अधिकारी अशोक खेमका देश भर में तब सबसे ज्यादा सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने 2012 में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी और डीएलएफ के बीच गुरुग्राम में हुए जमीन सौदे के म्यूटेशन को रद्द कर दिया था। इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में यह मुद्दा देशव्यापी बन गया था। अपने पूरे करियर में 57 बार ट्रांसफर का दंश झेलने वाले और 8 बार एक महीने से भी कम समय तक पद पर रहने वाले खेमका हाल ही में हरियाणा परिवहन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पद से रिटायर हुए हैं। अब देखना यह है कि उनके इस नैतिक समर्थन के बाद केंद्र सरकार इस विवाद पर आगे क्या कदम उठाती है।

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