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सपा नेता एसटी हसन के बयान पर दिनेश शर्मा का पलटवार, कहा- एक्शन पर रिएक्शन होता है तो सरकार के पास कठोर दंड देने का भी सिलेक्शन

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नई दिल्ली, 8 जनवरी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद दिनेश शर्मा ने दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में पथराव पर समाजवादी पार्टी के नेता एसटी हसन की विवादित टिप्पणी पर जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि अगर एक्शन पर रिएक्शन होता है तो सरकार के पास कठोर दंड देने का भी सिलेक्शन है। एक समाचार एजेंसी से बातचीत में सांसद दिनेश शर्मा ने कहा, “अगर रिएक्शन होगा तो सरकार के पास कठोर दंड देने का भी सलेक्शन है। यह फर्क नहीं पड़ता है कि हिंदू है या मुसलमान, कानून को हाथ में लेने वालों को ऐसा दंड मिलेगा कि तीन पीढ़ियां याद रखेंगी। अगर संवैधानिक कार्रवाई के बदले कोई असंवैधानिक तरीके से कानून को अपने हाथ में लेता है तो कानून के पास दंड के अधिकार भी मौजूद हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “कानून यह नहीं कहता है कि अंधेरे या उजाले में नियमों का पालन हो, बल्कि वह कहता है कि नियमों का पालन हो और नागरिकों की भी सुरक्षा हो। प्रशासन ने सभी पहलुओं को समझने के बाद ही निर्णय लिया होगा।” सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी पर उठते सवालों को लेकर भी दिनेश शर्मा ने जवाब दिया। उन्होंने कहा, “असल में सवाल यह है कि दंगा भड़काने वाले लोग कौन हैं। व्यक्ति कोई भी हो, अगर वह अपराध में संलग्न पाया जाता है तो निश्चित रूप से वह कानून के कटघरे में आएगा।”

इसी बीच, भाजपा सांसद ने अर्थव्यवस्था को लेकर राहुल गांधी के आरोपों पर भी पलटवार किया। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी का हर अनुमान गलत साबित होता है। इसी तरह भारत के संबंध में पाकिस्तान और चीन के अनुमान गलत साबित होते हैं। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है।” उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था तेज गति से बढ़ी और यह 7.4 प्रतिशत से भी अधिक है। इसका मुख्य कारण मजबूत घरेलू मांग और निजी उपभोग थे। भारत की जीडीपी का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा निजी उपभोग से आता है। बढ़ते रोजगार और उपभोक्ता की भावना से ग्रामीण और शहरी मांगें मजबूत हुईं।

दिनेश शर्मा ने कहा कि सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर शुरुआती खर्च बढ़ाया। सेवा के क्षेत्र में भी 9 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई। यह भारत के लिए अद्भुत है। मुद्रास्फीति नियंत्रण और जीएसटी में सुधारों से उपभोक्ता और व्यवस्थाओं को राहत मिली, और कच्चे तेल की कीमतें कम होने जैसे कारकों के कारण देश की जीडीपी दर 7.4 प्रतिशत के आसपास रही। भारत तीसरी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है।

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