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RBI MPC Meeting: तीन दिवसीय बैठक शुरू, रेपो रेट पर बुधवार को होगा बड़ा फैसला

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मुंबई, 3 अगस्त। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक सोमवार से शुरू हो गई। इस बैठक में रेपो रेट समेत प्रमुख मौद्रिक नीतियों और देश की आर्थिक स्थिति की समीक्षा की जाएगी। बैठक के फैसलों की घोषणा बुधवार सुबह 10 बजे आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा करेंगे। यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, भू-राजनीतिक तनाव, प्रमुख केंद्रीय बैंकों की सख्त मौद्रिक नीति और बढ़ती बॉन्ड यील्ड जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में बाजार और निवेशकों की नजरें आरबीआई के फैसले पर टिकी हैं।

रेपो रेट में बदलाव की संभावना कम

बाजार विशेषज्ञों और कई विश्लेषकों का मानना है कि छह सदस्यीय एमपीसी इस बार भी रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रख सकती है। उनका मानना है कि महंगाई और वैश्विक जोखिमों को देखते हुए आरबीआई फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव करने से बच सकता है।

SBI रिसर्च ने क्या कहा?

एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, अगले दो तिमाहियों में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई 5 प्रतिशत से ऊपर रहने की संभावना है। वहीं, घरेलू आर्थिक गतिविधियों में मजबूती के संकेत मिलने के कारण केंद्रीय बैंक मौजूदा नीति दरों को यथावत रख सकता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 7 प्रतिशत से अधिक रह सकती है, जो पहले के अनुमानों से बेहतर है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, रुपये पर दबाव और विदेशी पूंजी प्रवाह में अस्थिरता को देखते हुए आरबीआई की ओर से बहुत नरम रुख अपनाने की संभावना कम मानी जा रही है।

घरेलू अर्थव्यवस्था के संकेत सकारात्मक

रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में मजबूत विदेशी पूंजी प्रवाह, विदेशी मुद्रा भंडार में सुधार, बेहतर मानसून और जलाशयों में सामान्य स्तर के कारण घरेलू अर्थव्यवस्था के बुनियादी संकेतक मजबूत हुए हैं। इससे आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

जून में भी नहीं बदली थी रेपो रेट

गौरतलब है कि जून में हुई पिछली एमपीसी बैठक में आरबीआई ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा था और अपनी मौद्रिक नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ बनाए रखा था। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.6 प्रतिशत कर दिया था।

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