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राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस : फर्जी रसीदों से श्रद्धालुओं से वसूला जाता था दान, SIT जांच में बड़े खुलासे

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अयोध्या, 9 जुलाई। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने श्रद्धालुओं से दान के नाम पर धन एकत्र करने के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की रसीदों जैसी दिखने वाली फर्जी रसीदों का इस्तेमाल किया। इन नकली रसीदों पर ट्रस्ट का लोगो भी छपा हुआ था, जिससे श्रद्धालुओं के लिए असली और नकली रसीद में अंतर कर पाना मुश्किल हो जाता था। बुधवार को पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय को स्थानीय अदालत से रिमांड मिलने के बाद पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान पुलिस ने एक पुरानी फर्जी रसीद बुक भी बरामद की।

ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद बदला तरीका

सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने मुख्य आरोपी टिन्नू यादव के साथ मिलकर शुरुआत में इन्हीं फर्जी रसीदों के जरिए श्रद्धालुओं से चढ़ावे की राशि वसूली थी। बाद में जब ट्रस्ट ने ऑनलाइन रसीद प्रणाली लागू कर दी, तो इस तरीके का इस्तेमाल बंद कर दिया गया।

योग केंद्र से मिला QR कोड वाला दान पात्र

जांच के दौरान पुलिस ने एक सप्ताह पहले अयोध्या के एक योग केंद्र से ‘रामराज्य कोष’ नाम का दान पात्र भी जब्त किया था, जिस पर भुगतान के लिए सक्रिय QR कोड लगा हुआ था। आरोप है कि मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला पिछले करीब 10 वर्षों से उसी योग केंद्र में रह रहा था।

सर्राफा व्यापारी और कारोबारियों के यहां भी छापेमारी

पुलिस जांच के तहत आरोपियों को 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के जौरा क्षेत्र भी लेकर गई, जहां आशंका है कि चोरी की गई नकदी की गिनती कर उसका बंटवारा किया जाता था। इसके अलावा मिल्कीपुर क्षेत्र में अनुकल्प मिश्रा के रिश्तेदारों से जुड़े परिसरों, एक सर्राफा व्यापारी और इनायतनगर के भवन निर्माण सामग्री कारोबारी के यहां भी तलाशी अभियान चलाया गया।

40 दिनों में 70 संदिग्ध वारदातों की जांच

विशेष जांच दल (SIT) अब यह पता लगाने में जुटा है कि आरोपियों ने कथित तौर पर खरीदी गई संपत्तियों और सामान का भुगतान नकद किया था या डिजिटल माध्यम से। साथ ही ट्रस्ट के बड़े खर्चों से जुड़े बिलों और वाउचरों की भी जांच की जा रही है। इस मामले में अब तक आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। SIT की प्रारंभिक जांच में 40 दिनों के भीतर चढ़ावा चोरी की करीब 70 संदिग्ध घटनाओं की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसी आरोपियों की भूमिका के साथ-साथ दान राशि की गिनती और सुरक्षा व्यवस्था में संभावित प्रक्रियागत खामियों की भी गहन जांच कर रही है।

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