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सीबीआई निदेशक चयन को लेकर राहुल गांधी ने पीएम मोदी को पत्र लिख दर्ज कराई असहमति, बोले-मैं रबर स्टैम्प नहीं हूं

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नई दिल्ली, 13 मई। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) के नए डायरेक्टर की चयन प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच टकराव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास (7 LKM) पर आयोजित हाई-प्रोफाइल बैठक में नए सीबीआई चीफ के चयन के तौर-तरीकों पर तीखी असहमति जताई। बैठक के बाद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई और इस पत्र को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर भी साझा किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह सरकार की इस ‘पक्षपाती प्रक्रिया’ में सिर्फ एक “रबर स्टैम्प” बनकर शामिल नहीं हो सकते।

राहुल के पत्र की मुख्य बातें

राहुल गांधी ने अपने पत्र में सरकार पर जांच एजेंसियों के राजनीतिक दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए। पत्र के मुख्य अंश इस प्रकार हैं:

एजेंसी के दुरुपयोग का आरोप : “आपकी सरकार ने बार-बार सीबीआई का गलत इस्तेमाल किया है। यह देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी है, लेकिन इसे राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों और आलोचकों को निशाना बनाने का जरिया बना दिया गया है।”

शामिल करने का मूल उद्देश्य : “चयन समिति में विपक्ष के नेता को इसीलिए शामिल किया जाता है ताकि संस्था पर किसी एक का पूरी तरह से कब्जा न हो सके। लेकिन अफसोस है कि आपकी सरकार ने मुझे इस पूरी प्रक्रिया में कोई वास्तविक भूमिका नहीं दी।”

दस्तावेज न मिलने की शिकायत : “कई बार लिखित अनुरोध करने के बावजूद मुझे योग्य उम्मीदवारों के नाम और उनके डॉसियर (रिपोर्ट) पहले नहीं दिए गए। इसके बजाय, सीधे बैठक में पहली बार 69 उम्मीदवारों की एक लंबी सूची मेरे सामने रख दी गई।”

360-डिग्री इवैल्यूएशन रिपोर्ट से इनकार : राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि उम्मीदवारों के काम और उनके बैकग्राउंड को गहराई से समझने के लिए जरूरी ‘360-डिग्री इवैल्यूएशन रिपोर्ट’ उन्हें सौंपने से साफ मना कर दिया गया।

“चयन समिति को जरूरी और समय पर जानकारी न देकर सरकार ने इस पूरी संवैधानिक कवायद को सिर्फ एक औपचारिकता (Formality) बनाकर रख दिया है। विपक्ष का नेता कोई रबर स्टैम्प नहीं है।”

पीएम आवास पर हुई थी बैठक, सीजेआई भी थे मौजूद

यह विवाद उस समय खड़ा हुआ जब नए सीबीआई डायरेक्टर के नाम पर मुहर लगाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एक त्रिपक्षीय समिति (Three-Member Committee) की बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में प्रधानमंत्री और नेता विपक्ष राहुल गांधी के अलावा भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत भी शामिल थे।

24 मई को खत्म हो रहा है प्रवीण सूद का कार्यकाल

सीबीआई के मौजूदा डायरेक्टर प्रवीण सूद का कार्यकाल आगामी 24 मई को समाप्त होने जा रहा है। तय नियमों के मुताबिक, कार्यकाल खत्म होने से पहले नए डायरेक्टर की नियुक्ति की जानी अनिवार्य है। सीबीआई चीफ की रेस में देश के कई वरिष्ठ आईपीएस (IPS) अधिकारियों के नाम शामिल हैं, लेकिन राहुल गांधी की इस कड़ी असहमति और ‘डिसेंट नोट’ के बाद अब नए डायरेक्टर की नियुक्ति की प्रक्रिया राजनीतिक रूप से काफी गरमा गई है।

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