रायपुर, 24 जून। छत्तीसगढ़ के रायपुर रेंज में आने वाले एक छोटे से गांव कहारवे से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां पुलिस ने 46 वर्षीय एक किराना दुकानदार रामसहाय जायसवाल को गिरफ्तार किया है। रामसहाय पर आरोप है कि उसने पिछले चार माह में आठ लोगों को जहरीली शराब पिलाकर मौत के घाट उतार दिया। मामले का खुलासा तब हुआ, जब उसका 9वां कथित शिकार बच गया। उसी शख्स ने पुलिस को पूरी जानकारी दी।
कुत्ते को जहर देने से पहले किया था ‘ट्रायल रन’
पुलिस जांच के अनुसार, रामसहाय किसी व्यक्ति को निशाना बनाने से पहले अपनी योजना का ट्रायल करता था। राष्ट्रीय अंग्रेजी दैनिक ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, आरोप है कि रामसहाय ने इस वर्ष की शुरुआत में सुहागा (बोरैक्स) नामक रासायनिक पदार्थ का इस्तेमाल कर एक कुत्ते को जहर देकर मार डाला था। ग्रामीण क्षेत्रों में बोरैक्स का उपयोग अक्सर चूहे या कीड़े मारने के लिए किया जाता है। पुलिस का कहना है कि आरोपित ने चार महीने के दौरान तीन अलग-अलग मौकों पर इस रसायन को खरीदा था।
शिकार को अकेले बुलाता, शराब में जहर मिलाकर पिलाता था
‘साइको किलर’ रामसहाय पर आरोप है कि उसने चार माह में आठ लोगों को जहरीले केमिकल वाली शराब पिलाकर मार डाला। उसने इन लोगों को शराब पीने के लिए अपने घर बुलाया था। उसकी गिरफ्तारी सोमवार को हुई, जब नौवां पीड़ित बच गया। उसने पुलिस को एक ऐसे पैटर्न के बारे में बताया, जिस पर पुलिस को पहले शक नहीं हुआ था।
शराब में पहले से बोरैक्स मिला देता था
रिपोर्ट के अनुसार हर मामले में जान लेने का तरीका एक जैसा था। चार माह के दौरान आठ लोग खारवे गांव में जायसवाल के घर शाम को शराब पीने के लिए पहुंचे और उनमें प्रत्येक एक-दो दिन बाद मर गया। जब नौवां व्यक्ति बच गया और उसने अधिकारियों को जानकारी दी, तब पुलिस को एहसास हुआ कि वे शायद एक सीरियल किलर का सामना कर रहे हैं।
जांच में सामने आया कि आरोपी हर बार लगभग एक जैसा तरीका अपनाता था। वह किसी व्यक्ति को शाम के समय अपने घर शराब पीने के लिए बुलाता। इस दौरान इस बात का ध्यान रखता कि व्यक्ति अकेले आए। शराब में पहले से बोरैक्स मिला देता। पीड़ित शराब पीने के बाद घर लौट जाता। एक-दो दिन के भीतर उसकी तबीयत बिगड़ती और उसकी मौत हो जाती। पुलिस के अनुसार, सभी आठ मौतों में यही पैटर्न देखने को मिला।
परिवारों का भरोसा जीतता रहा आरोपित
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि किसी को भी शुरुआत में हत्या का शक नहीं हुआ। आरोप है कि कई मामलों में रामसहाय खुद पीड़ित परिवारों की मदद करता था। वह मृतकों को अस्पताल ले जाने में सहयोग करता, अंतिम संस्कार में शामिल होता और शोकाकुल परिवारों के साथ दिखाई देता था। इसी वजह से गांव वालों और परिजनों को उस पर संदेह नहीं हुआ। कुछ मामलों में तो पीड़ितों को अस्पताल तक नहीं ले जाया गया क्योंकि परिवारों ने उनकी हालत को सामान्य बीमारी समझा।
नौवां शिकार बचा, तभी खुला पूरा राज
मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब रामसहाय ने कार्तिक कुम्हार को भी शराब पीने के लिए बुलाया। कार्तिक शराब पीने के बाद गंभीर रूप से बीमार पड़ गया और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इलाज के दौरान उसने अपने परिवार को बताया कि वह बीमार होने से पहले रामसहाय के घर पर शराब पीकर आया था। इसके बाद परिवार और गांव के अन्य लोगों को शक हुआ। फिर उन्होंने छह जून को पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया और अब मामले में आगे की जांच जारी है।

