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प्रियंका गांधी ने महिला आरक्षण बिल मुद्दे पर सरकार को घेरा, बोलीं – ‘लोकतंत्र की बड़ी जीत, एनडीए के लिए काला दिन’

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नई दिल्ली, 19 अप्रैल। कांग्रेस महासचिव व वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने महिला आरक्षण बिल से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पास न होने की घटना को ‘लोकतंत्र की बहुत बड़ी जीत’ और सत्तारूढ़ ‘एनडीए के लिए काला दिन’ करार दिया है।

‘2023 में पास हुआ महिला आरक्षण बिल पेश करो, हम उसका पूरा समर्थन करेंगे’

निचले सदन में दो तिहाई बहुमत के आधार पर संविधान संशोधन विधेयक गिरने के एक दिन बाद शनिवार को यहां कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान प्रियंका गांधी ने मांग रखी कि केंद्र सरकार 2023 के महिला आरक्षण बिल को तुरंत फिर से पेश करे। उन्होंने कहा, ‘हम बहुत साफ-साफ कह रहे हैं, और हम यह हर मंच से कहेंगे, हम यह हर राज्य में कहेंगे सिर्फ कांग्रेस पार्टी ही नहीं, बल्कि विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. की हर पार्टी यह बहुत साफ-साफ कहेगी – वह 2023 का कानून वापस लाओ, जो पास हुआ था, उसमें जो भी बदलाव करना चाहते हो, करो, ताकि 2029 तक उसे लागू किया जा सके, हम उसका पूरा समर्थन करेंगे।’

‘इस सरकार के लिए हालात बदल गए हैं, उनके कामों से साफ दिखाई देता है’

कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘इस सरकार के लिए हालात बदल गए हैं। उनके कामों से यह साफ दिखाई देता है। पहली बात तो यह कि उन पर बहुत ज्यादा अंतरराष्ट्रीय दबाव है। वे जो भी कदम उठा रहे हैं – जैसा कि मेरे भाई ने कई बार कहा है – मुझे नहीं लगता कि कोई भी भारतीय प्रधानमंत्री अमेरिका के साथ की गई डील की शर्तें तब तक स्वीकार करता, जब तक कि उस पर बहुत ज्यादा दबाव न होता।’

प्रियंका वाड्रा ने लोकसभा में ‘संविधान बिल, 2026’ के पास न हो पाने को NDA सरकार के लिए ‘काला दिन’ बताया और सरकार से बिना किसी देरी के काररवाई करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, ‘अगर आप सच में कुछ ठोस करना चाहते हैं तो उस बिल को वापस लाएं, जो 2023 में सर्वसम्मति से पास हुआ था और जिसे सभी पार्टियों का समर्थन मिला था। यदि आपको उसमें कुछ छोटे-मोटे संशोधन करने की जरूरत है ताकि उसे अभी लागू किया जा सके, तो ऐसा करें और उसे अभी लागू करें। महिलाओं को उनके अधिकार दें – अभी के अभी।’

‘महिलाएं बेवकूफ नहीं हैं…वे सब कुछ देखती हैं’

एनडीए सरकार पर हमला जारी रखते हुए उन्होंने कहा, “केंद्र के लिए यह एक ‘काला दिन’ है क्योंकि उन्हें पहली बार एक जोरदार झटका लगा है, जिसके वे हकदार थे। आज महिलाओं की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। महिलाएं बेवकूफ नहीं हैं। वे सब कुछ देखती हैं। अब वह PR और मीडिया का शोर-शराबा काम नहीं आएगा।”

महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं, परिसीमन के खिलाफ

प्रियंका गांधी ने फिर दोहराया कि विपक्ष का रुख महिलाओं के आरक्षण के खिलाफ नहीं था, बल्कि इसे परिसीमन और जनगणना की प्रक्रियाओं से जोड़ने के खिलाफ था। उन्होंने जोर देकर कहा, ‘बात को तोड़-मरोड़कर और दूसरी चीज़ों से जोड़कर उन्हें गुमराह करने की कोशिश मत करो। इसे अभी करो। हम सब तैयार हैं।’

लोकतंत्र को कमजोर करने की सरकार की साजिश नाकाम हो गई

उन्होंने कहा, ‘कल जो हुआ, वह लोकतंत्र की एक बहुत बड़ी जीत थी। संघीय ढांचे को बदलने और लोकतंत्र को कमजोर करने की सरकार की साजिश नाकाम हो गई और रुक गई। यह संविधान की जीत थी, देश की जीत थी और विपक्ष की एकता की जीत थी। जिस तरह से वे यह बिल लाए हैं, जिन चीजों को उन्होंने इसके साथ जोड़ा है – जैसे परिसीमन, 2011 की जनगणना – उससे यह बिल्कुल साफ है कि उन्हें पहले से पता था कि यह बिल पास नहीं हो पाएगा। वे तो बस इसका राजनीतिक श्रेय लेना चाहते थे।’

महिलाओं का इस्तेमाल कर हमेशा सत्ता में बने रहने की साजिश रचने का भी लगाया आरोप

कांग्रेस नेता ने केंद्र पर महिलाओं का इस्तेमाल करके हमेशा सत्ता में बने रहने की साजिश रचने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यह एक साज़िश है, ताकि वे किसी भी तरह सत्ता में बने रह सकें… इसलिए, इस मकसद को पूरा करने के लिए वे यह योजना बना रहे हैं कि महिलाओं का इस्तेमाल करके हमेशा सत्ता में कैसे बने रहा जाए… उन्हें लगा था कि यदि यह बिल पास हो गया, तो वे जीत जाएंगे। और यदि यह पास नहीं हुआ, तो वे दूसरी पार्टियों को ‘महिला-विरोधी’ बताकर खुद को महिलाओं का मसीहा साबित कर देंगे… लेकिन हम जानते हैं कि महिलाओं का मसीहा बनना इतना आसान नहीं है।” उन्होंने केंद्र पर अपने वादे से मुकरने का आरोप लगाया और कहा कि महिलाएं इस सरकार पर भरोसा नहीं कर सकतीं।

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