ऑकलैंड/नई दिल्ली, 11 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के निमंत्रण पर आधिकारिक दौरे पर न्यूजीलैंड पहुंचे हैं। यह पिछले 40 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला न्यूजीलैंड दौरा है, जिसे दोनों देशों के संबंधों में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है। 10 जुलाई से शुरू हुए इस दौरे के दौरान गवर्नमेंट हाउस में प्रधानमंत्री मोदी का औपचारिक स्वागत किया गया। इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री लक्सन के साथ द्विपक्षीय वार्ता की।
दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा, शिक्षा, सुरक्षा, विज्ञान, खेल और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग सहित कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूजीलैंड के बिजनेस लीडर्स और भारतीय समुदाय को भी संबोधित किया तथा वहां के खेल नवाचारों का अवलोकन किया। दोनों नेताओं ने मार्च 2025 में प्रधानमंत्री लक्सन की भारत यात्रा को याद करते हुए उस दौरान मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर शुरू हुई बातचीत और रक्षा, शिक्षा, कस्टम्स, उद्यानिकी, वन तथा खेल जैसे क्षेत्रों में हुए समझौतों की प्रगति की समीक्षा की।
भारत-न्यूजीलैंड संबंधों को मिला रणनीतिक साझेदारी का दर्जा
साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, मजबूत जनसंपर्क और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समान हितों को ध्यान में रखते हुए भारत और न्यूजीलैंड ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा देने का फैसला किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने ‘भारत-न्यूजीलैंड रणनीतिक साझेदारी: रोडमैप टू 2030’ को मंजूरी देते हुए अगले चार वर्षों में सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की प्रतिबद्धता जताई।
राजनीतिक और कूटनीतिक सहयोग होगा मजबूत
दोनों देशों ने प्रधानमंत्रियों, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच नियमित संवाद और उच्चस्तरीय बैठकों को संस्थागत स्वरूप देने पर सहमति जताई। विदेश मंत्रियों के बीच नियमित वार्ता शुरू करने तथा दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच वार्षिक समीक्षा तंत्र को मजबूत करने का भी निर्णय लिया गया। संसदीय सहयोग बढ़ाने और सांसदों के आदान-प्रदान पर भी सहमति बनी।
रक्षा, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति
भारत और न्यूजीलैंड ने रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने, सैन्य स्तर पर नियमित संपर्क बढ़ाने तथा समुद्री सुरक्षा में सहयोग को विस्तार देने पर सहमति जताई। दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा संवाद शुरू करने, नौसैनिक अभ्यास बढ़ाने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सूचना साझा करने की व्यवस्था को मजबूत करने का फैसला किया। इसके अलावा साइबर सुरक्षा, आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी, संगठित अपराध और सीमा पार अपराधों के खिलाफ सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी। आतंकवाद विरोधी संयुक्त कार्य समूह (जॉइंट वर्किंग ग्रुप) के गठन के लिए समझौता ज्ञापन (एमओए) पर हस्ताक्षर किए गए।
2030 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य
दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 7 बिलियन न्यूजीलैंड डॉलर (करीब 35 हजार करोड़ रुपये) तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया। संतुलित और व्यापक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को जल्द लागू करने पर भी सहमति बनी। पर्यटन, कृषि, डेयरी, पशुपालन, बागवानी और वानिकी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई नए समझौतों का स्वागत किया गया। भारत और न्यूजीलैंड के बीच सीधी नॉन-स्टॉप उड़ानें शुरू करने की दिशा में एयरलाइंस को प्रोत्साहित करने पर भी दोनों नेताओं ने जोर दिया।
शिक्षा, विज्ञान और आपदा प्रबंधन में बढ़ेगा सहयोग
शिक्षा, अनुसंधान, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को द्विपक्षीय संबंधों का अहम आधार बताते हुए दोनों देशों ने विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। छात्र आदान-प्रदान, संस्थागत साझेदारी और नई तकनीकों में संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा। भारत की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) और न्यूजीलैंड की नेशनल इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी के बीच आपदा प्रबंधन सहयोग के लिए एमओयू पर भी हस्ताक्षर किए गए। साथ ही इंटरनेशनल सोलर अलायंस, डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस के तहत सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति बनी।
हिंद-प्रशांत और संयुक्त राष्ट्र सुधार पर साझा रुख
दोनों नेताओं ने स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए न्यूजीलैंड ने भारत की स्थायी सदस्यता के समर्थन को दोहराया।
वैश्विक मुद्दों पर साझा चिंता
प्रधानमंत्रियों ने मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव, यूक्रेन संघर्ष और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों पर चिंता व्यक्त की। दोनों नेताओं ने सीमा पार आतंकवाद की कड़ी निंदा करते हुए पहलगाम और नई दिल्ली में हुए आतंकी हमलों का उल्लेख किया तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। बैठक के अंत में दोनों प्रधानमंत्रियों ने वरिष्ठ अधिकारियों को ‘रोडमैप टू 2030’ के तहत तय पहलों को समयबद्ध तरीके से लागू करने और नियमित समीक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। दोनों नेताओं ने उच्चस्तरीय संवाद जारी रखते हुए भारत-न्यूजीलैंड रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

