नई दिल्ली, 12 मार्च। पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ने के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर बातचीत की। इस बढ़ते तनाव से आम नागरिकों की जान-माल के नुकसान, क्षेत्रीय स्थिरता और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
‘भारतीयों की सुरक्षा प्राथमिकता, हम शांति के पक्षधर‘
इजराइल-अमेरिका बनाम ईरान युद्ध के बीच पीएम मोदी और ईरानी राष्ट्रपति के बीच यह पहली प्रत्यक्ष वार्ता रही। पीएम मोदी ने पेजेश्कियान से बातचीत के बाद कहा कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, सामान और ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
पीएम मोदी ने कहा, ‘ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन से क्षेत्र की गंभीर स्थिति पर चर्चा हुई। क्षेत्र में बढ़ते तनाव, आम नागरिकों की मौत और नागरिक ढांचे को हुए नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की। भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, सामान और ऊर्जा के निर्बाध आवाजाही भारत की सर्वोच्च प्राथमिकताएं हैं। इस बीच भारत की शांति और स्थिरता के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई और बातचीत एवं कूटनीति के रास्ते से समाधान निकालने का आग्रह किया।’
Had a conversation with Iranian President, Dr. Masoud Pezeshkian, to discuss the serious situation in the region.
Expressed deep concern over the escalation of tensions and the loss of civilian lives as well as damage to civilian infrastructure.
The safety and security of…
— Narendra Modi (@narendramodi) March 12, 2026
उल्लेखनीय है कि दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लगभग बंद कर दिया है। यह एक बेहद रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है, जिसके जरिए दुनिया के करीब पांचवें हिस्से के कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होती है।
इस नाकेबंदी के साथ-साथ खाड़ी देशों के तेल प्रतिष्ठानों पर ईरान के हमले और ईरान में अमेरिका व इजराइल की काररवाई ने वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसके चलते दुनियाभर में तेल की भारी कमी और कच्चे तेल कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है।
इससे पहले विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मौजूदा हालात को लेकर अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से बातचीत की थी। इसके बाद जानकारी मिली कि ईरान ने होर्मुज से भारतीय तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही की अनुमति दे दी है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार ईरान के साथ बातचीत कर रही है ताकि फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ने वाले इस अहम समुद्री रास्ते से करीब 20 तेल और गैस टैंकरों को गुजरने की अनुमति सुनिश्चित की जा सके।

