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38 देशों के साथ ट्रेड डील पर बोले पीएम मोदी-  ‘राजनीतिक स्थिरता ने भारत में निवेशकों का विश्वास बहाल किया’

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नई दिल्ली, 15 फरवरी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि राजनीतिक स्थिरता ने भारत में निवेशकों का विश्वास बहाल किया है। उन्होंने केंद्रीय बजट, अमेरिका और यूरोपियन यूनियन के साथ ट्रेड डील के बाद समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में यह बात कही है। इन दो बड़े घटनाक्रमों के बाद यह किसी मीडिया आउटलेट को दिया गया उनका पहला इंटरव्यू है।

पीएम मोदी ने इंटरव्यू में कहा, ‘हमारे मजबूत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, सर्विस सेक्टर और एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) सेक्टर ने भारत को 38 देशों के साथ अपनी शर्तों पर व्यापार समझौता करने में सक्षम बनाया है। हमारे मुक्त व्यापार समझौते (FTA) टेक्सटाइल, लेदर, केमिकल, हैंडीक्राफ्ट्स, ज्वेलरी और अन्य क्षेत्रों में लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए बाजार पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से बनाए गए हैं।’

उन्होंने डिफेंस बजट में हुई बढ़ोतरी का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार का यह कर्तव्य है कि वह रक्षा क्षेत्र का आधुनिकीकरण मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप करे। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार देश के रक्षा बलों को समर्थन देने और उन्हें मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास किया है और आगे भी करती रहेगी।

रिफॉर्म एनडीए सरकार की प्रतिबद्धता

पीएम मोदी ने यूपीए सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन की कड़ी आलोचना की और कहा कि इस कारण भारत दूसरे देशों के साथ व्यापार समझौते को लेकर आत्मविश्वास के साथ बातचीत करने में असमर्थ रहा। उन्होंने कहा कि यूपीए शासन के दौरान ट्रेड डील पर बातचीत शुरू होती थी और फिर टूट जाती थी, कई देशों के साथ लंबी बातचीत के बावजूद कुछ ठोस परिणाम नहीं हासिल हुए। उन्होंने कहा, ‘रिफॉर्म एनडीए सरकार की प्रतिबद्धता है, जिसे उसने अपने शासन में प्रदर्शित भी किया है। एनडीए सरकार में रिफॉर्म एक्सप्रेस ने व्यापक स्तर पर प्रगति हासिल की है, लेकिन मैं स्वभाव से कभी पूरी तरह संतुष्ट नहीं होता।’

देश की आर्थिक तरक्की के लिए निजी क्षेत्र अहम

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में अगले चरण के आर्थिक परिवर्तन के लिए निजी क्षेत्र महत्वपूर्ण है और उन्होंने प्राइवेट सेक्टर से निर्णायक प्रतिक्रिया का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र को मार्जिन बचाने पर कम ध्यान देना चाहिए और रिसर्च एंड डेवलपमेंट, सप्लाई चेन और क्वालिटी में आक्रामक रूप से निवेश करना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘डेटा सेंटर हमारे युवाओं के लिए रोजगार के बड़े स्रोत बनेंगे। हम पूरी दुनिया के डेटा को भारत में स्थापित करने के लिए आमंत्रित करते हैं।’ उन्होंने कहा कि यूपीआई प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों के ट्रांजेक्शन के तरीके में बड़ा बदलाव हुआ है, जिसके कारण भारत दुनिया में डिजिटल लीडर बनकर उभरा है।

भारत में रखी जा रही एआई इकोसिस्टम की नींव

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत कंप्यूटिंग कैपेसिटी और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करके एक समृद्ध एआई इकोसिस्टम की नींव रख रहा है। उन्होंने अगले एक दशक के लिए सुधारों की तीन प्रमुख प्राथमिकताएं बताईं – संरचनात्मक सुधार, डीप इनोवेशन और सरल शासन व्यवस्था।

उन्होंने कहा कि इन सुधारों से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार मिलेगा। भारत अपने इतिहास में अब तक के सबसे बड़े और व्यापक बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) विस्तार का दौर देख रहा है, जिसे भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।

 

पीएम मोदी ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) 12.2 लाख करोड़ रुपये रखा गया है, जो 2013 की तुलना में करीब पांच गुना अधिक है। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार अल्पकालिक लोकलुभावन नीतियों के बजाय उत्पादक और दीर्घकालिक विकास पर खर्च को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि भारत को हर समय मजबूत और तैयार रहना जरूरी है, और सरकार इसी दिशा में लगातार काम कर रही है।

महिलाएं ही करेंगी भारत की प्रगति की अगुआई

प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी सरकार का हर फैसला महिलाओं के कल्याण को ध्यान में रखकर लिया जाता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भलाई सरकार की नीतियों और फैसलों की सबसे बड़ी मार्गदर्शक शक्ति है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी और देश की प्रगति की अगुवाई महिलाएं ही करेंगी।

सरकार अपने सैनिकों और सुरक्षाबलों के कल्याण को लेकर बेहद संवेदनशील

पीएम मोदी ने यह भी कहा कि सरकार अपने सैनिकों और सुरक्षाबलों के कल्याण को लेकर बेहद संवेदनशील है और उनकी जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। उन्होंने कहा कि दुनिया अब महामारी के बाद के दौर में प्रवेश कर चुकी है, जिसने भारत के लिए नए अवसरों के दरवाजे खोले हैं। उन्होंने बताया कि इंसेंटिव और टैरिफ में राहत से विकास को गति मिल सकती है, लेकिन स्थायी प्रतिस्पर्धा इनोवेशन, एफिशिएंसी और बड़े पैमाने पर उत्पादन से ही आएगी।

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