ऋतुओं के संधिकाल से मां आदिशक्ति की आराधना, साधना, उपासना और व्रत धारण कर शक्ति संचयन करने का महापर्व वासंतिक नवरात्र यानी चैत्र नवरात्र गुरुवार, 19 मार्च से प्रारंभ हो रहा है।
उदया तिथि में अमावस्या पड़ने के कारण चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि का क्षय
नौ दिनों का यह महापर्व हिन्दू वर्ष का पहला और प्रमुख पर्व होता है, जिसमें मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। इस वर्ष उदया तिथि में अमावस्या पड़ने के कारण चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि का क्षय है। 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च को राम नवमी से इसका समापन होगा।
माता का आगमन इस बार पालकी पर हो रहा
इस पर्व की शुरुआत में प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना कर मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है। इस बार नवरात्र का प्रारंभ चूंकि गुरुवार से हो रहा है, ऐसे में माता का आगमन इस बार पालकी पर हो रहा है।
चैत्र नवरात्र तिथि
पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 19 मार्च को सुबह 6.52 बजे से होगी। इसका समापन अगले दिन 20 मार्च को 4.52 मिनट पर होगा। चैत्र नवरात्र 19 मार्च से शुरू होगी।
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
इस चैत्र नवरात्र में घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 19 मार्च को सुबह 6.52 बजे और 7.43 बजे के बीच रहेगा। इसमें कलश की स्थापना कर लें। इस दौरान यदि, कलश स्थापना न कर पाएं तो इसके बाद, अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापना की जा सकती है, जो मध्याहन 12.05 बजे से 12.53 बजे के बीच होगा।
कलश का महत्व
शास्त्रों में कलश को सुख-समृद्धि,ऐश्वर्य और मंगल कामनाओं का प्रतीक माना गया है। बिना कलश स्थापना के कोई भी धार्मिक अनुष्ठान पूरा नहीं माना जाता है। इसलिए नवरात्र पर मां दुर्गा की पूजा करते समय माता की प्रतिमा के सामने कलश की स्थापना करनी चाहिए।
घटस्थापना के लिए सामग्री
घटस्थापना के लिए कलश (मिट्टी या तांबे का), नारियल, आम का टल्लो, गंगाजल, सुपारी, सिक्के, लाल कपड़ा, जौ (जवारे बोने के लिए) व मिट्टी का पात्र आदि।
कलश स्थापना की विधि
- नवरात्रि में कलश स्थापना के लिए सबसे पहले किसी पवित्र स्थान या गंगा से लाई गई मिट्टी से एक छोटी वेदी तैयार करें।
- इस वेदी पर जौ बोएं और उसके बाद कलश स्थापित करें।
- धार्मिक मान्यता के अनुसार कलश केवल एक पात्र नहीं बल्कि पूरी सृष्टि का प्रतीक माना जाता है।
- कलश पर स्वास्तिक बनाकर उसमें रोली, अक्षत और नारियल रखें, फिर विधि-विधान से वरुण देव का आह्वान करें।
- मान्यता है कि कलश में ब्रह्मा, विष्णु और महेश सहित सभी देवी-देवताओं का वास होता है। कुछ लोग कलश के चारों
- ओर जौ उगाते हैं, जबकि कुछ अलग बर्तन में जौ बोकर समृद्धि की कामना करते हैं।
- जौ बोना परिवार में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
- इसके बाद मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर को लाल या पीले वस्त्र बिछाकर लकड़ी की चौकी पर स्थापित करें।
- फिर धूप, दीप और नैवेद्य के साथ विधि-विधान से पूजा करें।
पालकी पर माता का आगमन
इस बार मां भगवती पालकी पर सवार होकर आ रही हैं। शास्त्रों में ऐसा आगमन शुभ नहीं माना जाता। इससे प्राकृतिक आपदाओं या उथल-पुथल की आशंका जताई जा रही है। इसलिए भक्तों को सतर्क रहने की सलाह है।

