अहमदाबाद, 4 अप्रैल। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने गुजरात के यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल को असंवैधानिक करार देते हुए कहा है कि यह मुसलमानों के अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता) का उल्लंघन कर रहा है।
यूसीसी एक निर्देशक सिद्धांत है, मौलिक अधिकार नहीं
उल्लेखनीय है कि गुजरात विधानसभा ने हाल ही में UCC बिल पास किया है। ओवैसी ने दावा किया कि यूसीसी एक निर्देशक सिद्धांत है, मौलिक अधिकार नहीं। इसका जिक्र संविधान के अनुच्छेद 44 में किया गया है। संविधान सभा की बहस के दौरान बाबासाहेब अंबेडकर ने यह नहीं कहा था कि संहिता बनने के बाद राज्य इसे सभी नागरिकों पर लागू करेगा। यह संहिता केवल उन लोगों पर लागू होगी, जो घोषणा करते हैं और स्वेच्छा से इसके प्रति बाध्य होने के लिए सहमत होते हैं।
यह उत्तराखंड में पास हुए बिल की कट-पेस्ट कॉपी
ओवैसी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह बिल उत्तराखंड में पास हुए बिल की ही कट-पेस्ट कॉपी है। इसमें हिन्दू विवाह और तलाक अधिनियम और हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम को अनुसूचित जनजातियों को छोड़कर बाकी सभी समुदायों पर लागू किया गया है। इसलिए यह कोई एकसमान बिल नहीं है।
‘यह सब हिन्दू धर्म का हिस्सा, आप इसे मुसलमानों पर क्यों लागू कर रहे?’
ओवैसी ने कहा कि यह मुसलमानों के अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता) का उल्लंघन कर रहा है। वे ही इससे प्रभावित पक्ष हैं। यह असंवैधानिक है। यदि अब किसी को तलाक लेना है तो उन्हें व्यभिचार साबित करना होगा और न्यायिक हिरासत में रहना होगा। यह सब हिन्दू धर्म का हिस्सा है। आप इसे हम (मुसलमानों) पर क्यों लागू कर रहे हैं?
हैदराबाद के सांसद ओवैसी ने इसमें लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रावधानों की भी कड़ी आलोचना की और इस मामले पर आरएसएस और भाजपा से सवाल पूछे। उन्होंने तर्क दिया कि यह शादी की पवित्रता को खत्म करता है और इस्लाम के खिलाफ है।
भाजपा ने कमीशन लेने को कानूनी बना दिया
उन्होंने कहा कि ‘गुजरात अशांत क्षेत्र अचल संपत्ति हस्तांतरण निषेध और किरायेदारों को परिसर से बेदखली से सुरक्षा का प्रावधान अधिनियम, 1991 में संशोधन करने वाले बिल में न केवल खरीदार और विक्रेता शामिल हैं, बल्कि उस क्षेत्र में रहने वाला कोई भी निवासी भी शामिल है। अब कोई तीसरा व्यक्ति भी तय इलाके में किसी भी प्रॉपर्टी डील के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है। भाजपा ने इसे किसी भी व्यक्ति द्वारा कमीशन लेने को कानूनी बना दिया है। हाई कोर्ट के पिछले फैसलों को देखते हुए यह सब असंवैधानिक है।
तो ऐसे संशोधन की जरूरत ही नहीं पड़ती
ओवैसी ने कहा कि इस संशोधन से राज्य सरकार की इलाकों को नोटिफाई करने की शक्ति भी बढ़ गई है। वह सांप्रदायिक तनाव के कारण अशांति और जबरन विस्थापन की आशंका वाले इलाकों को घोषित कर सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा का दावा है कि गुजरात एक शांतिपूर्ण राज्य है। यदि यह सचमुच शांतिपूर्ण होता तो ऐसे संशोधन की जरूरत ही नहीं पड़ती।
AIMIM प्रमुख ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी गुजरात में छह नगर निगमों, 29 तालुका पंचायतों और 28 जिला पंचायतों में स्थानीय निकाय चुनाव लड़ेगी। इसमें वह 539 उम्मीदवार उतारेगी।
गुजरात विधानसभा ने पिछले हफ्ते बिल पारित किया
गौरतलब है कि पिछले हफ्ते सात घंटे से ज्यादा चली लंबी बहस के बाद गुजरात विधानसभा ने यूसीसी बिल पारित किया। इस बिल का मकसद शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों को नियंत्रित करने के लिए धर्म की परवाह किए बिना एक समान कानूनी ढांचा लागू करना है।
शादी और लिव-इन संबंधों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
इसमें प्रावधान किया गया है कि यदि शादी जबर्दस्ती, दबाव या धोखे से की जाती है तो सात वर्षों की जेल की सजा होगी। साथ ही यह दो शादियों और बहुविवाह पर भी रोक लगाता है। इसके तहत शादी और लिव-इन संबंधों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है।
इस क्रम में विधानसभा ने ‘गुजरात अशांत क्षेत्र अचल संपत्ति हस्तांतरण निषेध और किरायेदारों को परिसर से बेदखली से सुरक्षा का प्रावधान अधिनियम, 1991 में संशोधन करने के लिए एक विधेयक भी पारित किया।

