नई दिल्ली, 14 मार्च। मिडिल ईस्ट में पिछले दो हफ्ते से जारी जंग थमने के जल्द आसार नजर नहीं आ रहे हैं क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने युद्ध को खत्म करने के लिए मध्य पूर्व के सहयोगी देशों की ओर से शुरू की गई कूटनीतिक बातचीत की कोशिशों को ठुकरा दिया है। समाचार एजेंसी रायटर्स के अनुसार ये प्रयास उस युद्ध को रोकने के लिए किए जा रहे थे, जो दो सप्ताह पहले अमेरिका और इजरायल के बड़े हवाई हमलों के साथ शुरू हुआ था।
दूसरी ओर ईरान ने भी साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका और इजराइल के हवाई हमले बंद नहीं होते, तब तक वह किसी भी युद्धविराम के लिए तैयार नहीं है। दो वरिष्ठ ईरानी सूत्रों ने बताया कि कई देश इस संघर्ष को खत्म कराने के लिए मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं।
दोनों पक्ष लंबे संघर्ष की तैयारी में
वॉशिंगटन और तेहरान दोनों की ओर से बातचीत में दिलचस्पी न दिखने से संकेत मिल रहे हैं कि यह युद्ध लंबा खिंच सकता है। इस बीच संघर्ष में आम लोगों की मौतें बढ़ रही हैं और ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने से तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं।
खार्ग द्वीप पर अमेरिकी हमले से बढ़ा दबाव
उल्लेखनीय है कि शुक्रवार की देर रात अमेरिका ने ईरान के मुख्य तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर हवाई हमले किए। इससे यह साफ संकेत मिला कि ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ सैन्य काररवाई जारी रखने के पक्ष में है।
ईरान के नए सर्वोच्च नेता की कड़ी चेतावनी
वहीं ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद रखने की कसम खाई है और पड़ोसी देशों पर हमले तेज करने की धमकी भी दी है। हालांकि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के बीच हुई टेलीफोनिक बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय जलयानों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोले हैं।
युद्ध में अब तक 2000 से ज्यादा लोगों की मौत
इस बीच युद्ध में अब तक 2000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें अधिकतर ईरान के नागरिक बताए जा रहे हैं। इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री यातायात लगभग ठप हो गया है। दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए इसका असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ रहा है।
ओमान और मिस्र ने शुरू की थी मध्यस्थता की कोशिश
युद्ध से पहले बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाला ओमान कई बार दोनों देशों के बीच संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर चुका है। दो सूत्रों के अनुसार ह्वाइट हाउस ने साफ कर दिया कि फिलहाल वह बातचीत में रुचि नहीं रखता।
वहीं मिस्र ने भी दोनों पक्षों के बीच संवाद शुरू कराने की कोशिश की, लेकिन अब तक इसमें कोई खास प्रगति नहीं हुई है। हालांकि इन प्रयासों से पड़ोसी देशों पर हमलों में कुछ सैन्य संयम जरूर देखने को मिला है।
ट्रंप ने पहले कहा था- अब बात करने में देर हो चुकी
युद्ध के पहले सप्ताह में ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच Truth Social पर लिखा था कि अमेरिकी और इजराइली हमलों के बाद ईरान की नेतृत्व व्यवस्था और सेना काफी कमजोर हो गई है और वे बातचीत करना चाहते हैं, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है।

