नई दिल्ली, 6 जुलाई। नीति आयोग ने देखभाल सेवाओं (केयर इकोनॉमी) पर जारी अपनी नई रिपोर्ट में कहा है कि देश में प्रशिक्षित केयरगिवर्स (देखभालकर्ता) की मौजूदा और भविष्य की मांग को पूरा करने के लिए एक मजबूत और पेशेवर कार्यबल तैयार करना समय की जरूरत है। आयोग का मानना है कि इससे न केवल भारत में गुणवत्तापूर्ण देखभाल सेवाएं मजबूत होंगी, बल्कि भारतीय पेशेवरों के लिए वैश्विक स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।
देखभाल कार्य को मिले पेशेवर पहचान
रिपोर्ट में कहा गया है कि केयरगिवर्स किसी भी देखभाल व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इसलिए देखभाल कार्य को एक कुशल, सम्मानजनक और मूल्यवान पेशे के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए। साथ ही कार्यबल के कल्याण, पेशेवर पहचान, संस्थागत सहयोग और परिवारों को किफायती एवं भरोसेमंद देखभाल सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया है।
भारत के सामने वैश्विक अवसर
नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने कहा कि दुनिया भर में प्रशिक्षित केयरगिवर्स की बढ़ती मांग भारत के लिए बड़ा अवसर है। उन्होंने कहा कि भारत इस क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व स्थापित कर सकता है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि इससे केयरगिवर्स को बेहतर सामाजिक पहचान और सामाजिक सुरक्षा भी मिलेगी। साथ ही भारत की सांस्कृतिक विरासत, ज्ञान-आधारित विशेषज्ञता और सॉफ्ट पावर को वैश्विक स्तर पर नई मजबूती मिलेगी।
2047 के विकसित भारत के विजन पर फोकस
नीति आयोग के सदस्य डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम ने कहा कि सेवा और संवेदना भारतीय सभ्यता के मूल मूल्य रहे हैं और देखभाल की भावना इन्हीं आदर्शों का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने कहा कि एक मजबूत देखभाल प्रणाली सामाजिक समावेश को बढ़ावा देगी, समुदायों को सशक्त बनाएगी, गुणवत्तापूर्ण रोजगार उपलब्ध कराएगी और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएगी।
राष्ट्रीय देखभाल नीति का रोडमैप
रिपोर्ट में राष्ट्रीय देखभाल नीति (National Care Policy) और राष्ट्रीय देखभालकर्ता परिषद (National Caregiver Council) के गठन का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा नीति, पेशेवर मान्यता, कार्यबल विकास, सामाजिक सुरक्षा, वैश्विक सहयोग तथा परिवार और समुदाय आधारित देखभाल प्रणाली को मजबूत करने के लिए विस्तृत रोडमैप भी पेश किया गया है।

