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प्रशांत भूषण का विवादास्पद ट्वीट, बोले – वैक्सीन लगवाने से मृत्यु की संभावना ज्यादा

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नई दिल्ली, 28 जून। कोरोनारोधी वैक्सीन की कमी के चलते चौतरफा आलोचनाएं झेलने के बाद केंद्र सरकार ने जहां वैक्सिनेशन अभियान की रफ्तार बढ़ा दी है वहीं देश के जाने-माने अधिवक्ता प्रशांत भूषण के विवादास्पद बयान से नया बखेड़ा खड़ा हो गया है। उन्होंने एक के बाद एक कई ट्वीट में वैक्सीन को सेहत के लिए खतरनाक करार दिया है और कहा है कि टीका लगवाने से मृत्यु की संभावना बढ़ जाती है। उनकी इन विवादित टिप्पणियों की चौतरफा आलोचना हो रही है।

प्रशांत भूषण ने एक ट्वीट में कहा, ‘मैंने न तो कोरोना की वैक्सीन लगवाई है और न ही मेरा ऐसा कोई इरादा है।’ उन्होंने लिखा, ‘स्वस्थ युवकों में कोरोना के कारण गंभीर प्रभाव या मौत की संभावना बहुत कम होती है। लेकिन वैक्सीन लगने के कारण उनकी मृत्यु की संभावना अधिक हो जाती है। कोरोना से ठीक होने वालों की नेचुरल इम्युनिटी, वैक्सीन की तुलना में कहीं बेहतर होती है। टीके उनकी नेचुरल इम्युनिटी से समझौता कर सकते हैं।’

उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि बच्चों को कोरोना की वैक्सीन नहीं लगवानी चाहिए। स्थिति बहुत खराब है। बायोमेडिकल एथिक्स की अवहेलना की जा रही है। विज्ञान मर चुका है। नूर्नबर्ग कोड का उल्लंघन करते हुए माता-पिता को गलत जानकारी दी जा रही है।

यदाकदा विवादास्पद बयान देन वाले प्रशांत भूषण कहा, ‘मेरे मित्र और परिवार सहित बहुत से लोग ने मुझ पर वैक्सीन हिचकिचाहट को बढ़ावा देने का आरोप लगातें है, मुझे अपनी स्थिति स्पष्ट करने दें। मैं वैक्सीन विरोधी नहीं हूं, लेकिन मेरा मानना है कि प्रायोगिक और परीक्षण न किए गए टीकों के सार्वभौमिक टीकाकरण को बढ़ावा देना गैर-जिम्मेदाराना है, खासकर युवा और कोविड से ठीक हुए लोगों के लिए।’

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