Site icon hindi.revoi.in

मायावती का सपा पर हमला, बोलीं- ‘PDA’ में पिछड़े से अब ‘पंडित’ तक पहुंची राजनीति

Social Share

लखनऊ, 8 जुलाई। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा अपनी संकीर्ण जातिवादी राजनीति और चुनावी स्वार्थ के लिए समय-समय पर अपना राजनीतिक रुख बदलती रहती है।मायावती ने कहा कि सपा ने पहले ‘पीडीए’ के जरिए पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को साधने की कोशिश की और अब ब्राह्मण समाज को जोड़ने के लिए ‘पी’ का मतलब ‘पंडित’ किया जा रहा है। उन्होंने इसे सपा की राजनीतिक रणनीति और छलावे का उदाहरण बताया।

‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ पर बसपा का जोर

मायावती ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी बयान में कहा कि बसपा ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति और सिद्धांत पर काम करने वाली सर्वसमाज हितैषी अंबेडकरवादी पार्टी है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में बसपा की चार बार सरकार भी इसी नीति और सिद्धांत के आधार पर चली है। इसके विपरीत, मायावती ने सपा पर जातीय राजनीति करने का आरोप लगाया।

‘PDA’ के बाद अब ‘पंडित’ पर मायावती का निशाना

बसपा प्रमुख ने सपा के ‘पीडीए’ फॉर्मूले को लेकर कहा कि इसमें ‘पी’ का इस्तेमाल पहले पिछड़े के लिए किया गया। अब, उनके मुताबिक, ब्राह्मण समाज को बसपा से जुड़ता देख सपा ने ‘पी’ से ‘पंडित’ का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। मायावती ने दावा किया कि ब्राह्मण समाज के लोगों का बसपा से जुड़ना और पार्टी की ओर से उन्हें उम्मीदवार बनाया जाना सपा के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से सपा ने अपने राजनीतिक नारे में बदलाव किया है।

‘राजनीतिक छलावे से पूरे समाज का भला नहीं हो सकता’

मायावती ने कहा कि इस तरह की राजनीति से किसी व्यक्ति विशेष को कुछ समय के लिए राजनीतिक लाभ मिल सकता है, लेकिन इससे पूरे समाज का भला नहीं हो सकता। उन्होंने सर्वसमाज के लोगों से ऐसी राजनीति से सावधान रहने की अपील की। मायावती ने कहा कि संकीर्ण जातिवादी राजनीति से समाज का व्यापक हित संभव नहीं है और सर्वसमाज के हित में ऐसी राजनीति से सतर्क रहना जरूरी है।

2027 से पहले यूपी में जातीय समीकरणों पर सियासत तेज

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजनीतिक दल जातीय समीकरणों को साधने में जुटे हैं। सपा की ओर से ‘पीडीए’ के जरिए पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं को जोड़ने की रणनीति पर जोर दिया जाता रहा है। वहीं, बसपा भी सर्वसमाज की राजनीति के जरिए विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। मायावती का ताजा बयान इसी राजनीतिक खींचतान के बीच आया है, जिससे यूपी की सियासत में जातीय समीकरणों को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है।

Exit mobile version