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दिल्ली : मालवीय नगर अग्निकांड में फरिश्ता बना गद्दा कारोबारी, गद्दे-रजाइयां बिछाकर 8 लोगों की बचाई जिंदगी

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नई दिल्ली, 4 जून। दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक बहुमंजिला होटल में बुधवार की सुबह आग लगने के बाद जब चौतरफा अफरा-तफरी मची थी और होटल में फंसे लोग मदद की गुहार लगा रहे थे, तभी होटल के सामने का एक गद्दा कारोबारी फरिश्ता बनकर सामने आया। उसने तनिक भी देर किए बिना करीब दो लाख रुपये मूल्य के अपने गद्दे-रजाइयां सड़क पर डाल दिए, जिससे कई लोगों की जान बच सकी।

आग लगने की सूचना मिलते ही पहुंचे कारोबारी

होटल में आग लगने की सूचना मिलते ही रियाजुद्दीन मंसूरी अपने कर्मचारियों के साथ मौके पर पहुंचे और उन्होंने करीब 20 से 25 रजाइयां और गद्दे निकालकर होटल के बाहर बिछाकर एक अस्थायी सुरक्षा कवच तैयार किया। इससे इमारत में फंसे लोगों को कूदकर सुरक्षित बाहर निकलने में मदद मिली।

रियाजुद्दीन ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले गद्दे और रजाइयां बिछाईं। इसका फायदा यह हुआ कि दमकल कर्मियों के पहुंचने से पहले ही आठ लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया था। हालांकि बचाव कार्य के दौरान उन्हें और उनके बेटे अरमान को भी चोटें आईं।

होटल में लगी आग के कारण 21 लोगों की हुई मौत

उल्लेखनीय है कि घनी आबादी वाले हौज रानी क्षेत्र स्थित ‘फ्लोरिश स्टे’ होटल में लगी आग में 21 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 11 विदेशी नागरिक शामिल थे। अधिकारियों के अनुसार, घायल हुए 35 लोगों में से 19 का दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में इलाज किया जा रहा है और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।

शीशे तोड़कर मदद की गुहार लगा रहे थे लोग

अधिकारियों ने बताया कि यह होटल मुख्य रूप से पास स्थित मैक्स अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के ठहरने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग तेजी से फैलने पर कई लोग खिड़कियों के शीशे तोड़कर मदद की गुहार लगा रहे थे।

गद्दों के कारण बची आठ लोगों की जान

करीब चार दशक से होटल के सामने गद्दों की दुकान चला रहे परिवार ने बताया कि लोगों को चोट से बचाने के लिए कई गद्दों और रजाइयों को एक-दूसरे के ऊपर रखा गया था। अरमान ने कहा कि करीब आठ लोग उन पर कूदे और सुरक्षित बच गए। केवल कुछ लोगों को मामूली चोटें आईं।

होटल में फंसी महिला भी बच्चे को लेकर तीसरी मंजिल से कूदी

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि इमारत में धुआं भर जाने से अफरा-तफरी का माहौल था। उन्होंने कहा कि एक महिला अपने बच्चे को गोद में लेकर तीसरी मंजिल से कूद गई जबकि अन्य लोग बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहे थे। ऐसे समय में गद्दे और रजाइयां कई लोगों के लिए सहारा बने।

जरूरतमंद लोगों की मदद करना मेरा फर्ज – रियाजुद्दीन

रियाजुद्दीन ने कहा, ‘मुझे करीब दो लाख रुपये का नुकसान हुआ। हमने मृतकों और घायलों को बाहर निकालने के लिए चादरें भी दीं। रजाइयों के कवर भी दिए। हमारे पास जो भी सामान था, हमने मानवता के नाते सब दे दिया। हिन्दू-मुसलमान से ऊपर इंसानियत है। हम सब हिन्दुस्तानी हैं। जरूरतमंद लोगों की मदद करना मेरा फर्ज था।’

आग पर समय रहते काबू नहीं पाया जाता तो चपेट में आ सकती थी दुकान

वहीं अरमान ने कहा कि यदि आग पर समय रहते काबू नहीं पाया जाता तो उनकी दुकान भी इसकी चपेट में आ सकती थी। उन्होंने कहा कि आपातकालीन सेवाएं शीघ्र मौके पर पहुंच गई थीं और बचाव अभियान में उन्होंने सहयोग किया। सभी समय पर पहुंचे और उन्होंने हमारी काफी मदद की।

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