तेहरान/मशहद, 14 जून। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे सैन्य तनाव और युद्ध जैसी स्थिति को समाप्त करने के लिए रविवार को एक ऐतिहासिक समझौता होने की उम्मीद जताई जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस आगामी समझौते को लेकर सकारात्मक बयान जारी किया है। हालांकि, ईरान सरकार की ओर से इस समझौते पर हस्ताक्षर करने के सटीक समय या तारीख को लेकर अभी तक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं की गई है। इस बीच, अमेरिका के साथ हाथ मिलाने की इस कूटनीतिक कोशिश का ईरान के भीतर ही तीव्र विरोध शुरू हो गया है। ईरान के प्रमुख शहरों में इस संभावित समझौते के खिलाफ उग्र प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं।
तेहरान और मशहद में फूटा प्रदर्शनकारियों का गुस्सा
बीबीसी फ़ारसी सेवा की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान में इस समझौते के विरोधियों ने सड़कों पर उतरकर अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राजधानी तेहरान के प्रमुख इब्न सिना स्क्वायर में एक विशाल रैली का आयोजन किया गया। इस रैली में शामिल प्रदर्शनकारियों ने ईरान के वर्तमान विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची और संसद (मजलिस) के स्पीकर मोहम्मद बग़र ग़ालिबाफ़ के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उल्लेखनीय है कि ये दोनों ही नेता अमेरिका के साथ बैक-चैनल और प्रत्यक्ष बातचीत में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।
तेहरान के अलावा, शनिवार शाम को ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद में भी भारी तनाव देखा गया। यहाँ विदेश मंत्रालय की क्षेत्रीय इमारत के सामने दर्जनों प्रदर्शनकारी जमा हुए और उन्होंने विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची के अमेरिका नीति से जुड़े बयानों की तीखी आलोचना की। फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी द्वारा जारी एक वीडियो में प्रदर्शनकारियों को अराग़ची के खिलाफ आक्रामक नारे लगाते हुए देखा जा सकता है
क्यों हो रहा है इस समझौते का विरोध?
प्रदर्शन की कमान संभाल रहे लोग ईरान के धुर-कट्टरपंथी और चरमपंथी संगठन “परसिस्टेंस फ़्रंट” (जभ्भह-ए पादरदारी) के करीबी बताए जा रहे हैं। समझौते का विरोध करने वाले गुटों के पास मुख्य रूप से निम्नलिखित आपत्तियां हैं:
रणनीतिक प्रभाव कम होने का डर: विरोधियों का दृढ़ता से मानना है कि अमेरिका के साथ किया जा रहा यह समझौता किसी भी सूरत में ईरान के राष्ट्रीय हितों में नहीं है। इससे खाड़ी क्षेत्र, विशेषकर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘होर्मुज़ स्ट्रेट’ में ईरान का दबदबा और सैन्य प्रभाव कमजोर हो जाएगा।
अमेरिका पर अविश्वास: कट्टरपंथियों का तर्क है कि अमेरिका पर भरोसा करके ईरान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के साथ समझौता कर रहा है।
विदेश मंत्री का बयान: नाकाबंदी हटेगी, पर संप्रभुता से समझौता नहीं
इस बीच, आंतरिक विरोध और आशंकाओं को दूर करने के लिए विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने एक टेलीविजन इंटरव्यू में इस समझौते के कुछ प्रमुख बिंदुओं को साझा किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि: “इस संभावित समझौते के तहत ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade) को पूरी तरह से हटा दिया जाएगा, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिलेगी।”
इसके साथ ही उन्होंने देश को आश्वस्त करते हुए कहा कि ‘होर्मुज़ स्ट्रेट’ पर ईरान का नियंत्रण और उसकी रणनीतिक स्थिति देश की प्रमुख डेटेरेंट (सैन्य निरोधक क्षमता) का हिस्सा बनी रहेगी और इससे कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद, देश के भीतर कूटनीति के रास्ते पर बढ़े कदम को लेकर जनता और सत्ता के एक धड़े में वैचारिक जंग छिड़ गई है।

