कोलकाता, 7 मई। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि ने विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पराजय के बावजूद इस्तीफा न देने पर अड़ीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मंत्रिपरिषद को गुरुवार की शाम बर्खास्त कर दिया और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत प्रभावी रूप से राज्य विधानसभा को भंग करने का आदेश जारी कर दिया।
ममता सीएम पद से इस्तीफा न देने पर अड़ गई थीं
गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि विधानसभा का कार्यकाल 7-8 मई के आसपास समाप्त हो रहा है, इसलिए अभी इस्तीफा देने की कोई जरूरत नहीं है।
बाद में ममता ने अड़ियल रुख अख्तियार करते हुए घोषणा कर दी थी कि उनके इस्तीफे का सवाल नहीं। उन्होंने पार्टी की बैठक में कहा कि बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगता है तो लग जाए, लेकिन वह इस्तीफा नहीं देंगी। टीएमसी सुप्रीमो ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाते हुए कहा था कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का परिणाम ‘जनादेश नहीं बल्कि एक साजिश’ है।
भाजपा को नई सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने का रास्ता साफ
फिलहाल संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत मंत्रियों का पद राज्यपाल की प्रसन्नता पर निर्भर करता है, जिसके आधार पर राज्यपाल ने यह कदम उठाया है। उन्होंने विधानसभा भंग करने के साथ भाजपा को नई सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने का रास्ता साफ कर दिया। हालांकि यह घटनाक्रम राज्य में संवैधानिक प्रक्रिया को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।
ज्ञातव्य है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की प्रक्रिया दो चरणों में संपन्न हुई। 20 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले गए। चार मई को हुई मतगणना में भाजपा ने पूर्ण बहुमत हासिल करते हुए तृणमूल कांग्रेस को डेढ़ दशक की सत्ता से बेदखल कर दिया। इस करारी शिकस्त के बावजूद ममता बनर्जी द्वारा इस्तीफा न देने और जनादेश को ‘साजिश’ बताने के चलते राज्य में संवैधानिक संकट पैदा हो गया, जिसके बाद राज्यपाल ने कैबिनेट बर्खास्त करने का फैसला लिया।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य की 294 में से जिन 293 सीटों के परिणाम सामने आए हैं, उनमें भाजपा को 207 सीटें मिलीं जबकि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी महज 80 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस के खाते में 2 सीटें आईं और सीपीआई (एम) को एक सीट से संतोष करना पड़ा।

