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केरल : वायनाड सुरंग परियोजना स्थल पर भूस्खलन, कई मजदूरों के फंसे होने की आशंका, 3 लोगों की मौत

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वायनाड (केरल), 7 जुलाई। केरल के वायनाड में मेप्पाडी के पास कल्लाडी में मंगलवार को भारी बारिश के कारण बड़े पैमाने पर हुए भूस्खलन से बड़ी तबाही की आशंका है। भूस्खलन से कई मजदूरों के मलबे में फंस गए हैं। अब तक तीन लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और कई लोग घायल हैं। वहीं घटना के बाद कल्पेट्टा से दमकल सेवाकर्मी मौके पर पहुंच गए हैं और बचाव अभियान जारी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार यह भूस्खलन कल्लाडी में मीनाक्षी पुल के पास हुआ, जहां मलप्पुरम और वायनाड जिलों को जोड़ने वाली सुरंग सड़क परियोजना का काम चल रहा था। अधिकारियों ने बताया कि स्थानीय निवासियों ने घटनास्थल से तीन लोगों को बचाया है। यह वह स्थान है, जहां सुरंग परियोजना से जुड़े श्रमिक रह रहे थे। इलाके में कुछ मकान और होमस्टे भी हैं। इसके अलावा, भूस्खलन में सुरंग परियोजना के कर्मचारियों को लाने-ले जाने वाले कुछ वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गए।

भूवैज्ञानिकों ने पहले ही भूस्खलन की चेतावनी दी थी

जिस इलाके में टनल बन रही है, पारिस्थितिक रूप से बहुत जरूरी है। भूवैज्ञानिकों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यहां भूस्खलन की संभावना है। चश्मदीदों का कहना है कि बारिश के कारण पहाड़ दरकने लगा और मलबा चारो तरफ फैल गया। भूस्खलन के कारण बड़े-बड़े पेड़ उखड़ गए हैं, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन पर असर पड़ा है।

बचाव अभियान के लिए पुलिस और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के कर्मियों को भी तैनात किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि कृषि मंत्री टी. सिद्दीकी और जिला कलेक्टर तलाशी अभियान की निगरानी कर रहे हैं तथा यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि प्रभावित क्षेत्र में और कितने लोग फंसे हुए हैं। मलप्पुरम और वायनाड जिलों को जोड़ने वाली अनक्कमपोयिल-मेप्पाडी परियोजना पर काम पिछले वर्ष शुरू हुआ था।

भारी तबाही की आशंका

बताया जा रहा है कि अनक्कमपोयिल-कल्लडी-मेप्पाडी टनल के निर्माण के लिए पत्थर तोड़े जाने के दौरान ऊपर से बड़ी मात्रा में मिट्टी और पत्थर गिर गए। शक है कि 30 से 50 मजदूर जमीन के नीचे फंसे हुए हैं। निर्माण कम्पनी के कार्यालय के तौर पर इस्तेमाल होने वाले कंटेनर, मजदूरों के साथ आई बस, कार और मिट्टी हटाने वाली मशीनें पूरी तरह से जमीन के नीचे दब गईं। इससे भारी तबाही की आशंका है।

कुछ पीड़ितों को स्थानीय लोगों ने एक हिम्मत वाले रेस्क्यू ऑपरेशन में बचाया। घायलों को प्राथमिक उपचार के लिए हैरिसन मलयालम एस्टेट अस्पताल ले जाया गया। अन्य कई श्रमिकों के फंसे होने का शक होने के बाद तलाश तेज कर दी गई है।

बिना वैज्ञानिक तरीके से मिट्टी जमा करने की वजह से हुआ हादसा – मंत्री टी. सिद्दीकी

वहीं मंत्री टी. सिद्दीकी ने कहा कि यह हादसा बिना वैज्ञानिक तरीके से मिट्टी जमा करने की वजह से हुआ। उन्होंने मीडिया को बताया कि यह हादसा वायनाड में एक टनल के कंस्ट्रक्शन से जुड़े बिना वैज्ञानिक तरीके से मिट्टी जमा करने की वजह से हुआ। चेतावनी दी गई थी कि थोड़ी सी बारिश में हादसा हो सकता है। इसको लेकर कोई जरूरी कदम नहीं उठाया गया।

उन्होंने कहा कि निर्देशों के बावजूद, कोई सही से प्रगति नहीं हुई। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले को देखेगी। काम रोकने और मिट्टी हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इस घटना में घायल दूसरे राज्यों के छह मजदूरों का इलाज चल चल रहा है।

रेस्क्यू ऑपरेशन में चुनौती बनी बारिश, सड़क यातायात बाधित

इस बीच खराब मौसम और भारी बारिश रेस्क्यू ऑपरेशन (बचाव अभियान) में बड़ी रुकावट बन रही है। मलबे को हटाने वाली मशीनों का इस्तेमाल करके मिट्टी हटाने के बाद ही और लोगों को बचाया जा सकता है। वहीं भूस्खलन के कारण इलाके में सड़क यातायात पूरी तरह से बाधित हो गया है। मीनाक्षी ब्रिज के पास छोटी नदी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जो चिंता का विषय है।

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