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JPSC Exam Scam : मुख्य आरोपी के ससुर से सीआईडी की पूछताछ, करोड़ों की संपत्तियां जांच के दायरे में

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रांची, 7 जुलाई। 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) सिविल सेवा परीक्षा में कथित गड़बड़ी और अभ्यर्थियों से अवैध धन उगाही के मामले में सीआईडी ने जांच तेज कर दी है। सीआईडी और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने गिरिडीह जिले के बेंगाबाद थाना क्षेत्र के हथबोर गांव में छापेमारी कर मुख्य आरोपी मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय तिवारी के ससुर विकास पांडेय को हिरासत में लेकर पूछताछ की।

सहायक शिक्षक से घंटों पूछताछ

विकास पांडेय स्थानीय सरकारी स्कूल में सहायक शिक्षक हैं। सीआईडी अधिकारियों ने उनके आवास पर कई घंटे तक पूछताछ की और बाद में उन्हें आगे की जांच के लिए अपने साथ ले गए। जांच एजेंसी का फोकस मुख्य आरोपी अभय तिवारी के दोनों सालों की भूमिका पर भी है।

समन के बाद फरार हुए दोनों साले

सीआईडी ने अभय तिवारी के दोनों सालों को पूछताछ के लिए समन भेजा था, लेकिन नोटिस मिलने के बाद से दोनों फरार बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि वे कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए विदेश चले गए हैं। इस संभावना की पुष्टि के लिए उनके यात्रा रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

करोड़ों की संपत्तियां जांच के दायरे में

सीआईडी और वित्तीय खुफिया शाखा अब आरोपी परिवार की संपत्तियों और आर्थिक गतिविधियों की भी गहन जांच कर रही है। जांच के दायरे में देवघर में निर्माणाधीन करोड़ों रुपये का अस्पताल, रांची में खरीदी गई जमीनें, तीन लग्जरी फ्लैट और गिरिडीह समेत अन्य जिलों में मौजूद संपत्तियां शामिल हैं। एजेंसी यह पता लगा रही है कि इन संपत्तियों के लिए इस्तेमाल धन का स्रोत वैध था या नहीं।

सरकारी पदों पर तैनात हैं परिवार के कई सदस्य

जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी अभय तिवारी दुमका जिले के पोड़ैयाहाट में मार्केटिंग ऑफिसर के पद पर कार्यरत था। उसने 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा भी पास की थी। उसकी पत्नी रांची में सहायक अनुभाग पदाधिकारी के पद पर तैनात है। इसके अलावा परिवार के अन्य सदस्यों के भी विभिन्न सरकारी परीक्षाओं के माध्यम से चयनित होने की जानकारी मिली है।

ओएमआर में हेरफेर और सेटिंग सिंडिकेट की जांच

सीआईडी का मानना है कि जेपीएससी और जेएसएससी-सीजीएल जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर ओएमआर शीट में हेरफेर और कथित ‘सेटिंग’ का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय था। यदि वित्तीय जांच में आय से अधिक संपत्ति या अवैध लेनदेन के प्रमाण मिलते हैं, तो आने वाले दिनों में कई अन्य प्रभावशाली लोगों पर भी कार्रवाई हो सकती है।

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