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लोकसभा में बोले जितेंद्र सिंह- पेपर लीक करने वालों को अब 5 माह के भीतर मिलेगी सजा

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नई दिल्ली, 28 जुलाई। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में एक दिन पहले पेश किए गए लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य पेपर लीक, संगठित परीक्षा घोटालों और अन्य अनुचित गतिविधियों पर पहले से अधिक प्रभावी ढंग से रोक लगाना है। सरकार छात्रों के भविष्य से किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी।

लोक परीक्षा अधिनियम, 2024 में संशोधन के लिए लाया गया यह विधेयक

जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह विधेयक लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन के लिए लाया गया है। 2024 का कानून परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और शुचिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाया गया था, लेकिन अब उसे और मजबूत करने की जरूरत महसूस हुई। प्रधानमंत्री के निर्देश के बाद सरकार यह संशोधन लेकर आई है ताकि पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रही हैं पेपर लीक की घटनाएं

उन्होंने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रही हैं। अलग-अलग राज्यों और अलग-अलग परीक्षाओं में पहले भी ऐसे मामले सामने आते रहे हैं, हालांकि पहले इस तरह की सख्त काररवाई नहीं होती थी, जैसी अब की जा रही है।

कांग्रेस शासनकाल में हुए पेपर लीक मामलों का जिक्र

वहीं, कांग्रेस पर निशाना साधते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2009 के रेलवे भर्ती परीक्षा पेपर लीक से लेकर 2012 के एम्स प्रवेश परीक्षा पेपर लीक तक कई बड़े मामले कांग्रेस सरकार के समय सामने आए। उन्होंने कहा कि इन्हीं घटनाओं से सबक लेते हुए सरकार ने एक लीकप्रूफ परीक्षा प्रणाली तैयार करने का फैसला किया।

कांग्रेस सरकार ने तत्कालीन समिति की सिफारिश भी लागू नहीं की

जितेंद्र सिंह ने बताया कि 1992 में कांग्रेस सरकार के दौरान एक समिति ने केंद्रीय परीक्षा समिति बनाने की सिफारिश की थी। इसके बाद 2010 में भी एक समिति ने यही सुझाव दिया, लेकिन कांग्रेस और यूपीए सरकारों ने इन सिफारिशों को लागू नहीं किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) का गठन किया और 2024 में पहली बार इस विषय पर व्यापक कानून बनाया, जिसे जून 2024 में लागू किया गया।

नए संशोधन का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था

केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि इस संशोधन का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था है। इसके तहत पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। इसके बाद ट्रायल कोर्ट में तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाया जाएगा। यानी घटना होने से लेकर फैसले तक अधिकतम पांच महीने का समय लगेगा।

किसी फैसले के खिलाफ 30 दिनों के भीतर करनी होगी अपील

उन्होंने बताया कि यदि कोई पक्ष फैसले के खिलाफ अपील करना चाहता है तो उसे 30 दिनों के भीतर अपील करनी होगी। साथ ही यह भी प्रावधान किया गया है कि ऐसे मामलों की सुनवाई हाई कोर्ट में डबल बेंच से नहीं होगी। उन्होंने कहा कि सरकार की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विधेयक पेश होने के साथ ही कानून मंत्रालय ने स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

उन्होंने यह भी बताया कि नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में गठित टास्क फोर्स ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। इसके अलावा राधाकृष्णन समिति की कुल 46 सिफारिशों में से 35 सिफारिशें सरकार पहले ही लागू कर चुकी है।

जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार की मंशा पूरी तरह ईमानदार है और यह संशोधन भी उसी सोच के तहत लाया गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस विधेयक के प्रावधानों पर किसी को कोई आपत्ति नहीं होगी क्योंकि यह कानून लाखों छात्रों के भविष्य की सुरक्षा और परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने के लिए लाया गया है।

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