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ईरान की इजराइल को चेतावनी- ‘सीजफायर का मतलब युद्ध खत्म होना नहीं, हमारी अंगुली अब भी ट्रिगर पर’

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नई दिल्ली, 9 अप्रैल। अमेरिका-ईरान के बीच दो हफ्तों के लिए सीजफायर की सहमति के बाद लेबनान पर इजराइली हमले के बाद तनातनी फिर उभर आई है और ईरान ने इस काररवाई को समझौते का उल्लंघन बताते हुए सख्त चेतावनी दी है कि उसकी ‘अंगुली अब भी ट्रिगर पर है।

ईरान ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सीजफायर का मतलब युद्ध खत्म होना नहीं है। देश की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (एसएनएससी) ने कहा कि यदि कोई उकसावे वाली काररवाई हुई तो उसका जवाब पूरी ताकत से दिया जाएगा। इसी बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी ईरान ने बड़ा फैसला लिया है, जिससे वैश्विक व्यापार और तेल सप्लाई पर असर पड़ सकता है।

होर्मुज में जहाजों की संख्या सीमित

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने तय किया है कि सीजफायर के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य से रोजाना अधिकतम 15 जहाजों को ही गुजरने दिया जाएगा। यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है।

इसके साथ ही एक प्रस्ताव पर भी चर्चा चल रही है, जिसमें ईरान और ओमान इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूल सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो यह वैश्विक व्यापार के लिए बड़ा बदलाव होगा।

इस्लामाबाद में ईरान व अमेरिका के बीच शुक्रवार से शुरू होनी है बातचीत

हालांकि ईरान ने दो हफ्ते के सीजफायर को स्वीकार करते हुए कहा है कि वह शुक्रवार से इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ बातचीत शुरू करेगा। लेकिन उसने दोहराया कि यह कदम सिर्फ बातचीत के लिए है न कि युद्ध खत्म करने के लिए।

वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भी अपने तेवर नरम किए हैं। उन्होंने कहा है कि यदि ईरान सीजफायर का पालन करता है और होर्मुज को खोलता है तो अमेरिका हमलों को आगे नहीं बढ़ाएगा।

बातचीत में चीन की भूमिका भी अहम

इस पूरे घटनाक्रम में चीन की भी अहम भूमिका बताई जा रही है। चीन ने पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देशों के जरिए ईरान को बातचीत के लिए तैयार करने में मदद की। हालांकि, हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हैं। कुछ इलाकों में मिसाइल अलर्ट की खबरें आई हैं और ईरान से जुड़े हमले भी जारी रहे हैं, जिससे सीजफायर की मजबूती पर सवाल बने हुए हैं।

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