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ईरान ने पूरी तरह खोल दिया होर्मुज स्ट्रेट, इजराइल-लेबनान सीजफायर के बाद विदेश मंत्री अब्बास अराघची का एलान

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लेबनान, 17 अप्रैल। पिछले डेढ़ माह से भी ज्यादा समय से मध्य पूर्व (Middle East) में जारी तनाव खत्म होने के आसार बनने लगे हैं। इस क्रम में पहले अमेरिका व ईरान के बीच दो हफ्तों के लिए युद्धविराम की सहमति बनी और फिर गुरुवार को इजराइल व लेबनान के बीच 10 दिनों के लिए सीजफायर हो गया। लेबनान में हुए इस अस्थायी युद्धविराम के बाद अब ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सभी व्यापारिक जहाजों के लिए पूरी तरह से खोलने का एलान किया है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शुक्रवार को इस आशय की घोषणा की।

सैयद अब्बास अराघची ने X पर एक पोस्ट कर लिखा, ‘लेबनान में हुए सीजफायर के अनुरूप, अब होर्मुज स्ट्रेट में सभी कमर्शियल जहाजों के लिए रास्ता पूरी तरह खोल दिया गया है। यह खुला रास्ता सीजफायर के बाकी बचे समय तक रहेगा। जहाजों को ईरान के पोर्ट्स एंड मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन की ओर से पहले ही घोषित किए गए कोऑर्डिनेटेड रूट से ही गुजरना होगा।’

ईरान ने इसी क्रम में स्पष्ट किया है कि यह छूट लेबनान में चल रहे युद्धविराम के साथ जुड़ी हुई है। ईरान ने उन मार्गों की  जानकारी पहले ही दे दी है, जिनसे होकर जहाज गुजर सकते हैं। इससे पहले युद्ध और तनाव के चलते इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही को लेकर भारी जोखिम बना हुआ था, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता देखी जा रही थी।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को दिया धन्यवाद

ईरान की इस घोषणा के तत्काल बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उसे धन्यवाद दिया। ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में कहा, “ईरान ने अभी-अभी घोषणा की है कि ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पूरी तरह से खुला है और जहाजों के पूरे गुजरने के लिए तैयार है। धन्यवाद!”

ट्रंप ने इस अहम व्यापारिक रास्ते को फिर से खोलने को युद्धविराम की एक शर्त बनाया था। हालांकि, बाद में जब तेहरान ने इस स्ट्रेट को नहीं खोला और दोनों पक्षों के बीच शांति समझौता नहीं हो पाया तो ट्रंप ने ईरान के बंदरगाहों पर नाकेबंदी लगा दी थी।

ईरान ने इसलिए ब्लॉक किया था होर्मुज

दुनिया की ‘ऑयल लाइफलाइन’ कहे जाने वाला होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच का एक संकरा समुद्री रास्ता है। दुनिया के कुल कच्चे तेल के व्यापार का लगभग 20% से 25% हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, UAE और कुवैत जैसे बड़े तेल उत्पादक देश इसी रास्ते पर निर्भर हैं।

यह समुद्री मार्ग इतना संकरा है कि इसके सबसे कम चौड़े हिस्से की दूरी महज 33 किलोमीटर के आसपास है। इस पर ईरान का सीधा प्रभाव रहता है। इसी के चलते ईरान ने अमेरिका-इजराइल साथ चले संघर्ष के दौरान इसे बंद कर दिया था और यहां से दुश्मन के तेल वाले जहाजों को निकलने नहीं दे रहा था।

होर्मुज खुलते ही कच्चे तेल की कीमतों में 11 फीसदी गिरावट

होर्मुज खुलने के एलान का असर तुरंत कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों पर दिखा। भारतीय समयानुसार शाम 7.21 बजे डब्ल्यूटीआई क्रूड 10.91 फीसदी गिरकर 84 डॉलर प्रति बैरल पर चल रहा था। ब्रेंट क्रूड भी 10.49 फीसदी लुढ़कर 88.97 डॉलर प्रति बैरल पर चल रहा था। ईरान-अमेरिका में लड़ाई शुरू होने के बाद क्रूड की कीमत एक समय बढ़कर 118 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। हालांकि, बाद में इसमें थोड़ी नरमी आई।

भारत के लिए भी बड़ी राहत

सच पूछें तो यह भारत के लिए बड़ी राहत वाली खबर है, जो अपनी जरूरत के 90 फीसदी क्रूड का खाड़ी देशों से आयात करता है। साथ ही 50 फीसदी गैस का आयात करता है। इस रास्ते का सुरक्षित रहना और फिर से खुलना भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए सुखद संकेत है।

मध्यपूर्व में लड़ाई शुरू होने के बाद भारत में भी क्रूड और गैस की सप्लाई पर असर पड़ा। इससे दोनों की कीमतें बढ़ी और सप्लाई में भी दिक्कत आई। इससे निजी तेल कम्पनियों ने ईंधन की कीमतें बढ़ाने का एलान किया। हालांकि, सरकारी तेल  कम्पनियों ने अभी नॉमर्ल पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई हैं।

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