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ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे 36 जहाजों को निकालेगा भारत, नेवी के युद्धपोत करेंगे एस्कॉर्ट

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नई दिल्ली, 10 मार्च। इजराइल-अमेरिका बनाम ईरान युद्ध के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के समुद्री क्षेत्र में भारत के 36 जहाज फंसे हुए हैं। अब भारत सरकार भारतीय झंडों वाले इन जहाजों को सुरक्षित निकालकर लाने के विकल्पों पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि इनमें से एक सुरक्षित विकल्प भारतीय नौ सेना द्वारा उन्हें एस्कॉर्ट करते हुए सुरक्षित निकाल कर लाने का विकल्प भी शामिल है।

सरकार के अनुसार फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट में फंसे सभी भारतीय जहाज सुरक्षित हैं और उनके पास किसी भी चीज की किल्लत नहीं है। लेकिन, भयानक युद्ध की वजह से इन जहाजों को बहुत ही सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना पड़ रहा है, जिसमें अथॉरिटी स्तर पर लगातार हालात की जानकारी साझा करना भी शामिल है।

होर्मुज स्ट्रेट के पास भारतीय युद्धपोतों की हो सकती है तैनाती

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारत सरकार फारस और ओमान की खाड़ी के बीच फंसे जहाजों को लाने के लिए भारतीय नौ सेना के जहाजों को भेज सकती है। नौवहन उद्योग के सूत्रों के अनुमान के मुताबिक उस क्षेत्र में जितने तेल टैंकर और गैस कैरियर फंसे हुए हैं, उनमें से लगभग 10 फीसदी भारतीय हैं।

इन व्यापारिक जहाजों में सरकारी कम्पनी शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के जहाज भी शामिल हैं। यही नहीं दुनियाभर के व्यापारिक जहाजों में काम करने वाले भारतीयों की संख्या को देखते हुए इस क्षेत्र में हजारों भारतीय नाविकों के भी फंसे होने का अनुमान है।

2019 में ऑपरेशन संकल्प लॉन्च कर चुकी है भारतीय नौ सेना

हालांकि यदि भारत सरकार होर्मुज स्ट्रेट में अपनी नौ सेना भेजने का फैसला लेती है तो यह पहली बार नहीं होगा और इंडियन नेवी को ऐसे ऑपरेशन का लंबा अनुभव रहा है। 19 जून, 2019 को भारतीय नौ सेना ने होर्मुज स्ट्रेट, अदन की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में फंसे अपने जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए ‘ऑपरेशन संकल्प’ लॉन्च किया था।

दरअसल, कुछ व्यापारिक जहाजों पर हमले हुए थे, जिसके बाद भारत को उस क्षेत्र में युद्धपोत भेजने पड़े थे। तब भारतीय नौ सेना का स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस तलवार लंबे समय तक खाड़ी क्षेत्र में तैनात रहा। भारतीय नौ सेना की सुरक्षा में तब रोजाना औसतन 16 भारतीय जहाजों को सुरक्षित निकाला जाता था।

भारतीय नौ सेना के अन्य समुद्री सुरक्षा ऑपरेशन

इसी प्रकार हूती विद्रोहियों के हमले से भारतीय व्यापारिक जहाजों और भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए भी भारतीय नौ सेना बड़े ऑपरेशन को अंजाम देती रही है। इनके अलावा सोमालिया के समुद्र डाकुओं से भारतीय जहाजों और भारतीयों की रक्षा के लिए भी इसी तरह के अभियान चलाए जा चुके हैं।

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान का स्टैंड

उधर ईरान की ओर से पहले यह कहा जा चुका है कि उसने होर्मुज स्ट्रेट को सिर्फ अमेरिका, इजराइल, यूरोप और अमेरिका के पश्चिमी सहयोगियों के लिए बंद किया है। ईरान के उप-विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने उसके बाद नई दिल्ली में रायसीना डायलॉग के दौरान भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को बंद नहीं किया गया है।

अब भारत सरकार की ओर से सूत्रों ने जानकारी दी है कि ईरान ने वादा किया है कि वह फारस की खाड़ी में पड़ोसियों को निशाना नहीं बनाएगा। इससे फंसे हुए भारतीय जहाजों को एक भरोसा मिला है कि वह होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजर सकते हैं।

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