ग्लास्गो, 3 अग्स्त। कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) 2026 का रविवार को भव्य क्लोजिंग सेरेमनी के साथ समापन हो गया। इस मौके पर भारत को कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की मेजबानी आधिकारिक रूप से सौंप दी गई। ग्लासगो के ओवीओ हाइड्रो में आयोजित समारोह में भारतीय संस्कृति, संगीत और खेल विरासत की शानदार झलक देखने को मिली। क्लोजिंग सेरेमनी के दौरान भारत की ओर से पेश किए गए सांस्कृतिक कार्यक्रम ने दर्शकों का दिल जीत लिया।
भारतीय गायक शंकर महादेवन, ऋषभ शर्मा और भूमि त्रिवेदी ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से समारोह में चार चांद लगा दिए। ‘वंदे मातरम’, ‘शिव स्तोत्र’ और लोकप्रिय गीत ‘सुनो गौर से दुनिया वालों’ की धुन पर हजारों भारतीय दर्शक खड़े होकर झूमते नजर आए। विदेशी दर्शकों ने भी भारतीय संगीत और संस्कृति का जमकर आनंद लिया।
अहमदाबाद 2030 की शुरुआत
समारोह के दौरान कॉमनवेल्थ गेम्स का बैटन स्कॉटलैंड से भारत को सौंपा गया। गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी को प्रतीकात्मक रूप से खेलों का झंडा सौंपा गया। इसके साथ ही वर्ष 2030 में अहमदाबाद में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के ऐतिहासिक आयोजन की दिशा में भारत की यात्रा शुरू हो गई। भारतीय जैवलिन थ्रो स्टार नीरज चोपड़ा और भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) अध्यक्ष पीटी उषा को भी कॉमनवेल्थ ध्वज सौंपा गया।
18 मिनट 27 सेकेंड की सांस्कृतिक प्रस्तुति
भारत की ओर से करीब 18 मिनट 27 सेकेंड का सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया, जिसमें देश की समृद्ध विरासत, खेल भावना और अहमदाबाद 2030 के विजन को दर्शाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत वॉयस-ओवर के साथ हुई, जिसमें संदेश दिया गया कि “भारत, जहां खेल जीवन जीने का एक तरीका है।” इसके बाद भारत की विविधता, संस्कृति और खेल उपलब्धियों को दर्शाने वाली प्रस्तुतियां पेश की गईं।
‘वसुधैव कुटुंबकम’ से दिखाई भारत की पहचान
भारतीय कार्यक्रम का पहला हिस्सा ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की थीम पर आधारित था। इसमें ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ के संदर्भ में भारत के शांति, एकता और समावेशिता के संदेश को दिखाया गया। इसके बाद एक विशेष फिल्म दिखाई गई, जिसमें कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के सफर, ऐतिहासिक उपलब्धियों और वैश्विक खेल मंच पर देश की बढ़ती भूमिका को प्रदर्शित किया गया।
भारत-स्कॉटलैंड संगीत का अनोखा संगम
कार्यक्रम के तीसरे हिस्से में भारतीय संगीतकार ऋषभ शर्मा और स्कॉटिश कलाकार रॉस एन्सली के बीच शानदार संगीत जुगलबंदी हुई। यह भारत और स्कॉटलैंड की सांस्कृतिक परंपराओं के मेल और ग्लासगो से अहमदाबाद तक खेलों के हस्तांतरण का प्रतीक बना।
जैस्मिन लैंबोरिया ने थामा तिरंगा
एथलीटों की पारंपरिक परेड के दौरान भारत के लिए गौरव का क्षण आया, जब कॉमनवेल्थ बॉक्सिंग चैंपियन जैस्मिन लैंबोरिया ने तिरंगा थामा। इसके बाद 74 कॉमनवेल्थ देशों और क्षेत्रों के खिलाड़ियों ने दोस्ती, एकता और खेल भावना के संदेश के साथ मार्च किया।
100वीं वर्षगांठ का ऐतिहासिक आयोजन
वर्ष 2030 में अहमदाबाद में होने वाला कॉमनवेल्थ गेम्स आयोजन ऐतिहासिक होगा, क्योंकि यह खेलों की 100वीं वर्षगांठ का संस्करण होगा। भारत ऑस्ट्रेलिया के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स की दो बार मेजबानी करने वाला दूसरा देश बनेगा। ग्लासगो से अहमदाबाद तक कॉमनवेल्थ गेम्स की मशाल पहुंचने के साथ ही भारत के लिए इस ऐतिहासिक आयोजन की उल्टी गिनती शुरू हो गई है।

