नई दिल्ली, 5 मार्च। इजराइल और अमेरिका के संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के छह दिनों बाद भारत सरकार ने पहली बार संवेदना व्यक्त की है और आधिकारिक तौर पर खामेनेई की हत्या की निंदा की है। इस क्रम में सरकार की तरफ विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास जाकर शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए।
Foreign Secretary Shri Vikram Misri visited the Embassy of the Islamic Republic of Iran and signed the condolence book, on behalf of the people and the Government of India, on the demise of Supreme Leader Ayatollah Syed Ali Khamenei. pic.twitter.com/lOODHeI5fm
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) March 5, 2026
भारत सरकार के इस कदम को बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि अब तक मोदी सरकार ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी थी। सवाल उठ रहा था कि भारत ने बिना उकसावे वाले इस हमले की अब तक निंदा क्यों नहीं की? कांग्रेस सहित कई विपक्षी पार्टियां खुलकर भारत सरकार से सवाल कर रही थीं कि ईरान के सुप्रीम लीडर की हत्या की निंदा खुलेमंच पर क्यों नहीं की गई। इतना ही नहीं कांग्रेस की दिग्गज नेता सोनिया गांधी ने तो लेख लिखकर भारत सरकार की विदेश नीति की आलोचना भी की थी।
खाड़ी देशों पर अंधाधुंध बरसाईं मिसाइलें
उल्लेखनीय है कि इजराइल और अमेरिका ने अचानक ही ईरान पर अटैक कर दिया। मिसाइलों के आक्रमण से ईरान की राजधानी तेहरान शहर थर्रा गया। इजराइल ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के घर को भी निशाना बनाया, जिसमें खामेनेई और उनके परिवार के कई सदस्यों की मौत हो गई। इस हमले के बाद से ईरान बौखला गया है और उसने खाड़ी देशों पर अंधाधुंध मिसाइल बरसानी शुरू कर दी हैं।
ईरान ने बंद किया सबसे बड़ा व्यापार मार्ग
हमले से बौखलाए ईरान ने पहले तो खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिका के सैन्य ठिकानों को ही निशाना बनाया, लेकिन बाद में काररवाई को आगे बढ़ाते हुए आम लोगों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों पर भी हमले शुरू कर दिए। सऊदी अरब, बहरीन, यूएई, कतर, कुवैत सहित कई देशों को ईरान की तरफ से निशाना बनाया गया। ईरान ने इस समय तेल सप्लाई रूट के सबसे बड़े मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भी बंद कर रखा है।

