गांधीनगर, 6 जुलाई। गुजरात सरकार ने पंचायती राज व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने निर्देश जारी किए हैं कि ग्राम पंचायत, तालुका (तहसील) पंचायत और जिला पंचायत का वार्षिक ऑडिट पूरा होते ही अनिवार्य रूप से ‘एग्जिट कॉन्फ्रेंस’ आयोजित की जाएगी। इसका उद्देश्य ऑडिट में सामने आने वाली गंभीर अनियमितताओं पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
ऑडिट के तुरंत बाद होगी समीक्षा बैठक
पंचायत एवं ग्रामीण आवास निर्माण विभाग ने 28 जुलाई को जारी परिपत्र के माध्यम से नई व्यवस्था पूरे राज्य में लागू कर दी है। इसके तहत प्रत्येक पंचायत का ऑडिट पूरा होने के बाद निर्धारित तिथि पर जिला विकास अधिकारी (DDO) की अध्यक्षता में एग्जिट कॉन्फ्रेंस आयोजित होगी। बैठक में स्थानीय निधि लेखा विभाग के वरिष्ठ ऑडिट अधिकारी केवल गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं को प्रस्तुत करेंगे, ताकि उन पर बिना देरी के कार्रवाई की जा सके।
गबन और वित्तीय अनियमितताओं पर होगी तत्काल कार्रवाई
नई व्यवस्था के तहत गबन, नियमों के विरुद्ध खरीद, अवैध नियुक्तियां, वित्तीय गड़बड़ियां और अन्य गंभीर प्रशासनिक मामलों की सीधे समीक्षा होगी। जिला विकास अधिकारी प्राथमिकता के आधार पर अनुशासनात्मक, सुधारात्मक या कानूनी कार्रवाई शुरू कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे ऑडिट केवल औपचारिक प्रक्रिया न रहकर जवाबदेही तय करने और त्वरित निर्णय लेने का प्रभावी माध्यम बनेगा।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश
राज्य सरकार के अनुसार यह कदम पंचायतों में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और सार्वजनिक धन के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इससे वित्तीय अनियमितताओं पर समय रहते कार्रवाई हो सकेगी और विकास कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी।
ग्रामीण विकास को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ ग्रामीण नागरिकों को मिलेगा। गांवों के विकास के लिए आवंटित धन का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा, जबकि अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही भी बढ़ेगी। इसके अलावा सड़क, पेयजल, स्वच्छता और अन्य विकास परियोजनाओं में गुणवत्ता सुधारने के साथ सार्वजनिक धन के दुरुपयोग पर भी प्रभावी रोक लग सकेगी।

