अयोध्या, 31 जनवरी। यूपी में अयोध्या के GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है। इसके साथ ही प्रशांत सिंह ने कहा कि कि उन्होंने बिना किसी दबाव के यह फैसला लिया है और फिलहाल अपने दफ्तर में काम कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि प्रयागराज माघ मेला में मौनी अमावस्या के दिन संगम स्नान के लिए रथ पर जाने को लेकर उभरे विवाद के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ लगाए गए आरोपों से ‘काफी आहत और दुखी’ होकर प्रशांत सिंह ने इस्तीफा दे दिया था।
‘बिना किसी दबाव के वापस लिया इस्तीफा‘
प्रशांत कुमार सिंह ने कहा, ‘मैंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है। मुझ पर कोई दबाव नहीं है। मैंने बिना किसी दबाव के इस्तीफा वापस लिया। आज मैं अपने ऑफिस में हूं और काम कर रहा हूं।’ उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह उनका व्यक्तिगत निर्णय है।
भाई के आपराधिक संबंधों का दावा
प्रशांत कुमार सिंह ने उनपर फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के सहारे नौकरी पाने का आरोप लगाने वाले सगे भाई विश्वजीत सिंह के खिलाफ उल्टे गंभीर आपराधिक आरोप लगाया और कहा कि वह मुख्तार अंसारी के मऊ गैंग का सक्रिय सदस्य है और उसका फाइनेंशियल एडवाइजर भी रहा है। उनके मुताबिक विश्वजीत सिंह के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। विश्वजीत ने अपने माता-पिता के साथ मारपीट की, जिस मामले में एफआईआर दर्ज है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विश्वजीत ने जियो ब्रांच मैनेजर को जान से मारने की धमकी दी और लोगों से वसूली करता है। उन्होंने कहा, ‘उसका काम लोगों पर पैसे के लिए दबाव बनाना है, वह एक अपराधी है।’
फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र मामले पर भी दी सफाई
फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र मामले को लेकर प्रशांत कुमार सिंह ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में उनके भाई विश्वजीत सिंह ने सीएमओ मऊ को एक आवेदन देकर कहा था कि प्रशांत कुमार सिंह को जारी दिव्यांग प्रमाणपत्र फर्जी है क्योंकि उस पर तारीख और डॉक्टरों के हस्ताक्षर नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि सीएमओ मऊ ने फर्जी प्रमाणपत्र बनाने वाले व्यक्ति के खिलाफ काररवाई करने के बजाय सीधे उनके खिलाफ जांच के आदेश दे दिए जबकि प्रमाणपत्र उसी कार्यालय से जारी हुआ था। उनके अनुसार पहले यह जांच होनी चाहिए थी कि प्रमाणपत्र सही है या नहीं।
‘सीएमओ ने खुद प्रमाणपत्र को बताया असली‘
प्रशांत कुमार सिंह ने बताया कि वह अयोध्या के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के सामने पेश हुए। वहां से मऊ के सीएमओ से प्रमाणपत्र की सत्यता के बारे में पूछा गया। जवाब में मऊ सीएमओ ने लिखकर दिया कि प्रमाणपत्र असली है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रमाणपत्र को असली बताया जा चुका है तो उसे बार-बार फर्जी क्यों कहा जा रहा है।

