नई दिल्ली, 27 मार्च। केंद्र सरकार ने मध्य पूर्व में जारी संकट के दौरान सामने आने वालीं चुनौतियों पर नजर रखने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक अंतर मंत्रालयी समूह (Inter-Ministerial Group) का गठन किया है। गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के साथ दूसरे मंत्री भी इस समिति के सदस्य हैं।
पेट्रोल-डीजल में एक्साइज ड्यूटी घटाने के बाद सरकार का फैसला
सूत्रों के अनुसार, मध्य पूर्व संघर्ष से संबंधित चिंताओं को दूर करने के लिए अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन किया गया है। इसी क्रम में सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम कर दिया है। डीजल निर्यात पर लगने वाले अप्रत्याशित लाभ कर और विमानन टरबाइन ईंधन पर लगने वाले करों में भी संशोधन किया गया है। इन उपायों का उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच ईंधन की कीमतों को स्थिर करना है।
सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में उछाल से उपभोक्ताओं को बचाने के लिए पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क घटाकर तीन रुपये प्रति लीटर कर दिया है और डीजल पर इसे शून्य कर दिया गया है। मंत्रालय ने कहा कि शुल्क में यह कटौती तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर तीन रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। डीजल पर यह शुल्क पहले के 10 रुपये से घटाकर शून्य कर दिया गया है।
लॉकडाउन की अफवाहों को भी केंद्र ने किया खारिज
पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाने के बाद सरकार ने एक और मुद्दे पर मोर्चा संभाला। देश में लॉकडाउन लगाए जाने की खबरों के बीच केंद्रीय मंत्रियों ने सामने आकर इसे सिरे से खारिज कर दिया। सबसे पहले पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने कहा कि देश में लॉकडाउन नहीं लगाया जा रहा है। फिर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा कि पैनिक लेने की जरूरत नहीं है। भारत में लॉकडाउन नहीं लगेगा।
दरअसल, भारत कच्चे तेल की अपनी जरूरतों का 88 फीसदी और प्राकृतिक गैस की जरूरत का लगभग आधा हिस्सा आयात करता है। इनमें से अधिकतर आपूर्ति ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ के रास्ते होती है। ईरान पर अमेरिकी और इजराइली हमलों के बाद तेहरान ने इस जलडमरूमध्य को बाधित कर दिया है, जिससे टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है।

