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G-7 सम्मेलन : भारत को आमंत्रण देने में झिझक रहा जर्मनी, रूस की तरफदारी बन रही बाधक

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बर्लिन, 13 अप्रैल। यूक्रेन पर हमले बाद रूस की निंदा नहीं करने वाले भारत को लेकर जर्मनी असमंजस में पड़ गया है कि वह जून में प्रस्तावित G-7 सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित करे या नहीं।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार इस गोपनीय मसले की जानकारी रखने वाले लोगों ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि जर्मनी बवेरिया में होने वाली बैठक में सेनेगल, दक्षिण अफ्रीका और इंडोनेशिया को अतिथि के रूप में शामिल करने के लिए तैयार है, लेकिन उसकी लिस्ट में भारत विचाराधीन है। बताया जाता है कि यूक्रेन में युद्ध शुरू होने से पहले तैयार की गई सूची में भारत शामिल था, लेकिन उस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया था।

रूसी हथियारों का एक महत्वपूर्ण खरीदार है भारत

गौरतलब है कि भारत उन 50 से अधिक देशों में शामिल था, जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से रूस को निलंबित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के वोट से परहेज किया और रूस पर प्रतिबंध नहीं लगाया। भारत रूसी हथियारों का एक महत्वपूर्ण खरीदार है, जो कहता है कि उसे अपने पड़ोसियों चीन और पाकिस्तान को रोकने की जरूरत है।

इस बीच जर्मन सरकार के प्रवक्ता स्टीफन हेबेस्ट्रेइट ने कहा कि जैसे ही इसे अंतिम रूप दिया जाएगा, बर्लिन अपने मेहमानों की अपनी सूची पेश करेगा। हेबेस्ट्रेइट के अनुसार चांसलर ने बार-बार साफ किया है कि वह अधिक से अधिक अंतरराष्ट्रीय भागीदारों को प्रतिबंधों में शामिल होते देखना चाहते हैं।

रूसी ऊर्जा आयात पर निर्भरता के लिए जर्मनी खुल आलोचनाओं के घेरे में

दिलचस्प तो यह है कि रूसी ऊर्जा आयात पर अपनी निरंतर निर्भरता के लिए जर्मनी खुद यूक्रेन और पोलैंड सहित कई सरकारों की आलोचना के घेरे में आ गया है। हालांकि जर्मन कम्पनियों के रूसी प्राकृतिक गैस पर बहुत अधिक निर्भर होने के बावजूद जर्मनी ने उस निर्भरता को कम करने के लिए कदम उठाए हैं। जी-7 देशों ने रूस के खिलाफ प्रतिबंध लगाने में अग्रणी भूमिका निभाई है और कुछ ने तो यूक्रेन को हथियार भी भेजे हैं।

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